[भाषा] Bhasha Kise Kahate Hain 😍 | भाषा किसे कहते हैं- पूरा परिचय | भाषा की परिभाषा, प्रकार, उदाहरण

Bhasha Kise Kahate Hain | भाषा किसे कहते हैं ❓ | भाषा किसे कहते हैं 🤔 भाषा की परिभाषा 2022

प्रिय पाठकों, मानव एक सामाजिक प्राणी 💃🏃 है। हर इंसान अपने विचारों को दूसरे तक पहुंचाने की चाह रखता है। भाई- बहन से, माता-पुत्र से, पति पत्नी से, गर्लफ्रेंड ❤ ब्वाइफ्रेण्ड से भाषा के माध्यम से ही अपनी दिल की फीलिंग्स को पहुँचा पाते हैं। यंहा तक कि पशु पक्षी 🐵🐊🐦 आदि भी अपनी बातों को विविध संकेतों के माध्यम से अभिव्यक्त करते हैं। 

प्यारे मित्रों, आज हम कुछ ऐंसे ही महत्वपूर्ण विषय की चर्चा करने जा रहे हैं। जी हां, आज हम Bhasha Kise Kahate Hain- भाषा किसे कहते हैं 🤔 (भाषा किसे कहते हैं भाषा की परिभाषा क्या है) इस विषय की विस्तारपूर्वक चर्चा करने जा रहे हैं। 

आज के इस विषय में- भाषा के कितने रूप होते हैं, मौखिक भाषा किसे कहते हैं, लिखित भाषा किसे कहते हैं, सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं, मशीनी भाषा किसे कहते हैं, मातृभाषा किसे कहते हैं 🤔- इत्यादि भाषा सम्बंधित विभिन्न बिन्दुओं की रोचक चर्चा करने जा रहे हैं। 

तो आइए, अपने ज्ञान को बढाइये। सबसे पहले जानते हैं कि भाषा किसे कहते है- Bhasha Kise Kahate Hain

[भाषा]• Bhasha Kise Kahate Hain * [ भाषा किसे कहते हैं •] | भाषा की परिभाषा, प्रकार - 2022


भाषा क्या है - Bhasha Kya Hai

भाषा एक वस्तु नहीं है, भाषा एक लडकी नहीं है, भाषा एक स्त्री नहीं है, भाषा एक हथियार नहीं है। भाषा है- बोलने का माध्यम है। जिसके द्वारा हम बोलते हैं, आप बोलते हैं, लिखते हैं, कहते हैं - वही भाषा है। यंहा आपके मन में एक सवाल जरूर होना चाहिए कि बोलते तो हम मुँह से हैं- तो क्या मुँह भाषा हुई। 

नहीं जी, मुँह से हम जरूर बोलते हैं लेकिन मुँह भाषा नहीं है। हमने पहले ही कहा कि जिसके द्वारा हम बोलते हैं, लिखते हैं, कहते हैं- वह भाषा है। बोलने का माध्यम मुँह तो है ही लेकिन एक दूसरा माध्यम भी है। वह है- भाषा। सोचिए, जरा अगर आपके पास मुँह हो लेकिन भाषा नहीं तो क्या आप कुछ बोल पाएंगे। 


बिल्कुल नहीं। फिर चाहे, आपके सामने दुश्मन हो, आपका दोस्त हो, आपकी प्रेमिका हो- आप कुछ नहीं बोल पाएंगे। उस स्थिति में आप केवल ध्वनि या बडबड़ाहट ही कर पाएंगे, और अगर बडबडाने वाली भाषा भी न हो तो तब तो बोलना ही क्या! अपने विचारों को बिल्कुल भी नहीं पहुंचा पाएंगे। 

यही भाषा की पहचान है लेकिन ठहरिए, इतने से काम नहीं चलेगा। अब हम विस्तार से भाषा किसे कहते हैं-भाषा की परिभाषा को समझेंगे। तो आइये और पाइये।


Bhasha Kise Kahate Hain | भाषा किसे कहते हैं 🤔

जिन ध्वनि समूहों के द्वारा मनुष्य परस्पर विचारों का आदान- प्रदान करता है उसे भाषा कहते हैं। जिसके द्वारा हम परस्पर अपने विचारों, भावों तक एक दूसरे तक पहुंचाते हैं, उसे भाषा कहते हैं। भाषा केवल मनुष्य तक ही सीमित नहीं है बल्कि भाषा का प्रयोग पशु पक्षी, जीव-जन्तु आदि भी करते हैं। 

अपने भावों, विचारों को किसी व्यवस्थित प्रक्रिया के माध्यम से एक दूसरे तक पहुँचाना ही भाषा कहलाता है। शायद अब आप भाषा किसे कहते हैं- यह समझ चुके होंगे। 

आइये, भाषा किसे कहते है- एक उदाहरण से समझते हैं- आपको यदि यह लेख पसंद आता है तो आप नीचे कमेंट करके एक इमोजी भेज देंगे। उस इमोजी के माध्यम से आप अपनी पसंद को अभिव्यक्त करेंगे। यही भाषा है।भाषा  लिखित, मौखिक, सांकेतिक आदि क‌ई प्रकार की हो सकती है। Bhasha Kise Kahate Hain- Udaharan Sahit

गर्लफ्रेंड/ब्वाइफ्रेण्ड ❤ को इमोजी भेजकर अपने भाव बताना, ट्रेन कर्मचारी का लाल या हरी झंडी के द्वारा ट्रेन को रोकने का संकेत करना, पशु-पक्षियों का आपस में चहचहाना, गूगें-बहरों का आपस में बड़बडा़ना- यह सब भाषा का ही उदाहरण है। 


भाषा किसे कहते हैं- यह तो आप समझ गये होंगे लेकिन भाषा की परिभाषा क्या है? विभिन्न विद्वानों ने भाषा की परिभाषा क्या बताई- यह भी जान लीजिए। तो आइये, निजज्ञान को उच्चशिखर तक ले जाइये।


भाषा किसे कहते हैं भाषा की परिभाषा (Bhasha Ki Paribhasha)

विभिन्न विद्वानों ने भाषा की अलग-अलग परिभाषा बताई है। सबसे पहले हम भाषा की एक सर्वमान्य व प्रसिद्ध परिभाषा देखते हैं।

भाषा की परिभाषा- भाषा वह साधन है, जिसके द्वारा हम अपने विचारों को व्यक्त कर सकते हैं। इसके लिए हम वाचिक ध्वनि, संकेत, लिपि आदि का प्रयोग करते हैं। यह भाषा की सामान्य परिभाषा है। 

विभिन्न प्रसिद्ध भाषाशास्त्र के वैज्ञानिकों ने भाषा की क्या परिभाषा बताई है- आइये अब इसका जिक्र करते हैं। चूंकि आपकी अपनी यह SanskritExam. Com वेबसाइट मुख्य रूप से संस्कृत व सनातन धर्म को समर्पित है। 

अतः भाषा की परिभाषा की शुरुआत सबसे पहले अपने हिंदू धर्म के संस्कृत शास्त्रों से करते हैं।


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धर्मशास्त्रों में भाषा की परिभाषा व महत्व

भारतीय हिंदू धर्म के विभिन्न शास्त्रों में भाषा का अलौकिक दिव्य माहात्म्य प्रतिपादित किया गया है। वेदों में भी भाषा को साक्षात् वाग्देवी का स्वरूप बताया गया है। संस्कृत शास्त्रों में भाषा की परिभाषा व महत्व के विषय में कुछ महत्वपूर्ण उद्धरण श्लोक आदि नीचे दिए गये हैं।


वाण्येका समलंकरोति पुरुषं या संस्कृता धार्यते। (भर्तृहरि शतक)

हिंदी अर्थ- वाणी (भाषा) ही एक ऐंसा माध्यम है जो व्यक्ति को अलंकृत कर सकती है।


क्षीयन्ते खलु भूषणानि सततं वाग्भूषणं भूषणम्। 

हिंदी अर्थ- इस संसार में केवल वाणी रूपी आभूषण ही एक ऐंसा आभूषण है, जिसका कभी नाश नहीं होता।


वाचामेव प्रसादेन लोकयात्रा प्रवर्तते।

इदमन्धतमः कृत्स्नं जायेत भुवनत्रयम्।

यदि शब्दाह्वयं ज्योतिरासंसारं न दीप्यते।। (काव्यादर्श, दण्डी)

हिंदी अर्थ-  वाणी= भाषा की कृपा से ही संसार की यात्रा चलती है। यदि यह भाषा (शब्द रूपी) दिव्य ज्योति न होती तो सारा संसार अन्धकारमय हो जाता।


अहं राष्ट्री संगमनी वसूनां चिकितुसी प्रथमा यज्ञियानाम् (ऋग्वेद वाक्सूक्त)

हिंदी अर्थ- ऋग्वेद के वाक्सूक्त में वाणी (भाषा) की अलौकिक दिव्य महिमा बताई गयी है। स्वयं वाग्देवी अपने लिए कहती है कि- अहम् मैं ही राष्ट्र में सभी समृद्धि का मूल हूँ। मैं ही यज्ञ कर्ताओं के मुख में प्रथम शब्द के रूप में अवस्थित हूँ।



एकः शब्दः सम्यक् जातः स्वर्गे लोके च कामधुक् भवति। (पतंजलि-महाभाष्य)

भाषा का इतना बड़ा महत्व है कि एक भी शब्द यदि सही ढंग से शुद्ध मन से, शुद्ध भाव से प्रयोग किया जाए तो वह इहलोक और परलोक में समस्त कामनाओं का देने वाला हो जाता है।


बोली एक अमोल है, जो कोई बोले जानी।

हिये तराजू तोलिये, तब मुख बाहर आनी।। (कबीरदास)

हिंदी अर्थ- बोली (भाषा) अथवा वाणी का कोई मोल नहीं कर सकता। वह अनमोल है। हमें एक एक शब्द को तराजू की तरह तोलकर बोलना चाहिए। 

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डाॅ० भोलेनाथ तिवारी के अनुसार- भाषा की परिभाषा

भाषा उच्चारण अवयवों से उच्चारित यादृच्छिक ध्वनि प्रतीकों की वह व्यवस्था है जिसके द्वारा एक समाज के लोग आपस में भावों व विचारों का आदान प्रदान करते हैं।


डाॅ० बाबूराम सक्सेना के अनुसार- भाषा की परिभाषा

जिन ध्वनि समूहों द्वारा मनुष्य परस्पर विचार विनिमय करता है उनको समष्टि रूप से भाषा कहते हैं।


हेनरी स्वीट के अनुसार- भाषा की परिभाषा

Henry Sweet- ध्वन्यात्मक शब्दों द्वारा विचारों को प्रकट करना ही भाषा कहलाता है।


आचार्य किशोरीदास वाजपेयी के अनुसार- भाषा की परिभाषा

विभिन्न अर्थों में संकेतित शब्द समूह ही भाषा है, जिसके द्वारा हम अपने विचार या मनोभाव दूसरों के प्रति बहुत सरलता से प्रकट करते हैं।


प्लेटो के अनुसार- भाषा की परिभाषा

विचार और भाषा में थोड़ा सा ही अन्तर है। विचार आत्मा की मूक या अध्वन्यात्मक बातचीत है और वही शब्द जब ध्वन्यात्मक होकर होठों पर प्रकट होती है तो उसे भाषा का नाम दिया जाता है।


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वेंद्रीय विद्वान के अनुसार- भाषा की परिभाषा

भाषा एक तरह का चिह्न है। चिह्न अर्थात् वे प्रतीक जिनके द्वारा मनुष्य अपने विचार दूसरों के सामने प्रकट करता है। ये प्रतीक बहुत प्रकार के होते हैं जैंसे- नेत्रग्राह्य, श्रोत्रग्राह्य, स्पर्शग्राह्य आदि। 


ब्लाक तथा ट्रेगर विद्वान के अनुसार- भाषा की परिभाषा

भाषा यादृच्छिक भाष प्रतीकों का तंत्र है जिसके एक सामाजिक समुदाय सहयोग करता है।


ए. एच गार्डिबर के अनुसार- भाषा की परिभाषा

"The common definition of speech is the use of articulate sound symbols for the expression of thought." अर्थात् विचारों की अभिव्यक्ति के लिए जिन व्यक्त तथा स्पष्ट ध्वनि संकेतों का व्यवहार किया जाता है, उनके समुदाय को भाषा कहा जाता है।


डा० मंगलदेव के अनुसार- भाषा की परिभाषा

भाषा मानव की उस चेष्टा अथवा व्यापार को कहते हैं, जिससे मनुष्य अपने उच्चारणोपयोगी शरीर अवयवों से उच्चारित वर्णनात्मक अथवा व्यक्त शब्दों के द्वारा अपने विचारों को प्रकट करता है।


डा० पी०डी० गुणे के अनुसार- भाषा की परिभाषा

Language In it's widest sense means, therefore, the sum total of such signs of our thoughts and feelings as are capable of external perception and as could be produced and repeated at will.

अर्थात् भाषा का व्यापक अर्थ है कि हमारे विचारों व भावों का ऐंसा समूह जो देखा व सुना जा सके एवं इच्छया उत्पन्न किया एवं दुहराया जा सके।


भाषा किसे कहते हैं (Bhasha Kise Kahate Hain- Video Tutorial)

उपरोक्त वीडियो में- Learn Easy यूट्यूब चैनल की मैडम जी ने भाषा किसे कहते हैं- भाषा को बहुत ही अच्छे ढंग से समझाया है। मैडम जी का जितना धन्यवाद करें उतना कम है। 😍🙏


भाषा शब्द की उत्पत्ति (Bhasha Shabd Ki Utpatti)

भाषा शब्द की उत्पत्ति को समझने के लिए हम संस्कृत का स्मरण करना होगा क्योंकि भाषा शब्द संस्कृत से ही निकला है। भाषा शब्द की उत्पत्ति- भाष् धातु से हुई है। भाष धातु संस्कृत में बोलने के अर्थ में प्रयुक्त होती है। 

जैंसे- रामः भाषते (राम बोलता है) संस्कृत की भाष् धातु से स्त्रीलिंग में टाप् प्रत्यय करने भाषा शब्द की उत्पत्ति होती है। भाष्यते अनया इति भाषा - अर्थात् जिसके द्वारा बोला जाए उसे भाषा कहते हैं। अंग्रेजी में भाषा शब्द को Language कहा जाता है। 



भाषा की उत्पत्ति (Bhasha Ki Utpatti)

इससे पहले हमने भाषा शब्द की उत्पत्ति की चर्चा की। अब थोड़ा भाषा की उत्पत्ति के बारें में भी जान लीजिए। भाषा शब्द की उत्पत्ति के बारें में तो हमने बड़ी आसानी से बात कर दी लेकिन सावधान! भाषा की उत्पत्ति के बारे में जानना इतना आसान नहीं। 

भाषा अर्थात् शब्द, भाषा अर्थात् वाणी, भाषा अर्थात् ध्वनि, भाषाएँ अर्थात् केवल इक ओंकार- इसकी उत्पत्ति कब हुई। यह प्रश्न अत्यन्त गूढ व जटिल है। ब्रह्मा जी की इस सृष्टि में शब्द का अस्तित्व अनादिकाल से है। 

अतः मूल रूप से यह कहना विवादास्पद व विचारहीन अवस्था है कि भाषा की उत्पत्ति कब हुई। कैंसे हुई- यह तो कल्पना की जा सकती है कि ब्रह्मा जी ने भाषा को उत्पन करने के लिए एक शब्द सृष्टि के आदि में समस्त ब्रह्माण्ड में विस्तारित किया। योगियों ने उसे ओंकार का नाम दिया, किसी ने उसे शब्द ब्रह्म बताया। वही भाषा की उत्पत्ति का पहला चक्र था।

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भाषा किसे कहते हैं- भाषा और व्याकरण में क्या सम्बन्ध है?

अपने विचारों को दूसरे तक पहुँचाने का माध्यम ही भाषा है। भाषा में प्रयुक्त शब्दों के सही-गलत का ज्ञान कराने वाला उसका व्याकरण होता है। दूसरे शब्दों में कहें कि भाषा के मानकों की पहचान, उनका बोध व्याकरण से ही होता है।

भाषा और व्याकरण का आपस में एक बहुत बडा सम्बन्ध है। बोलचाल एवं अपने विचारों को सामान्य रुप से दूसरे तक पहुँचाने के लिए व्याकरण की अत्यधिक आवश्यकता नहीं है तथापि यह जान लेना आवश्यक है कि व्याकरण के बिना भाषा अधूरी है। 

मानों कि भाषा एक सुन्दर रूपवती नवयौवना स्त्री के समान है और व्याकरण उसका पति। उस भाषा रूपी पत्नी को व्याकरण अपने सह सम्बन्ध से सुसज्जित एवं व्यवस्थित करता है। अन्यथा पति के बिन पत्नी की कोई पहचान होती है। ठीक उसी प्रकार व्याकरण के बिना भाषा की पहचान नहीं होती। 

व्याकरण के बिना भाषा का शुद्ध रूप का ज्ञान नहीं हो सकता है। व्याकरण रूपी पति भाषारूपी पत्नी को उच्चारण रूपी बिंदी से, सही गलत के नियम से अलंकृत अथवा उसका शृंगार करता है। अब आपको जरूर स्पष्ट हो गया होगा कि भाषा और व्याकरण का सम्बन्ध कितना गहरा है। हमें नीचे कमेंट व शेयर करके अपना प्यार अवश्य दिखाएँ।


उपभाषा किसे कहते हैं (UpBhasha Kise Kahate Hain)

उपभाषा भाषा का ही एक छोटा रूप होता है। उप अर्थात् छोटा। भाषा एक बडे समाज में स्वीकारा होती है जिसमें कि विभिन्न राजकाज भी किए जाते हैं। भाषा का ही छोटा रूप होता है- उपभाषा।  

UpBhasha Kise Kahate Hain इसकी सीधी परिभाषा है कि उपभाषा भाषा के ही उस छोटे रूप को कहते हैं जिसे एक छोटा समुदाय अपने स्वच्छंद अनुसार प्रयोग करने लगता हो। उपभाषा को ही बोली भी कहा जाता है। बोली कहने से उपभाषा का अर्थ आपको शायद अच्छे से समझ आ गया होगा। 

बोली भी जब अपना आकार विस्तृत बना देती है तो वह एक नयी भाषा का रूप ले लेती है। उदाहरण के लिए- गढवाली। गढवाली एक बोली (उपभाषा) थी लेकिन धीरे वह अब भाषा का रूप लेने लगी। उपभाषा (बोली) को अंग्रेजी में डायलेक्ट (Dialect) भी कहा जाता है।


भाषा के कितने रूप होते हैं (Bhasha Ke Kitne Roop Hote Hain)

वैंसे तो भाषा के बहुत सारे रूप देखने को मिलते हैं तथापि भाषा के कुछ रूप अत्यन्त प्रसिद्ध हैं। जैंसे हमने रोचकता के लिए कहा था एक भाषा एक सुन्दर पत्नी के समान है। 

जब इस भाषा रूपी पत्नी के रूपों की बात करते हैं तो इसके तीन रूप हैं- कभी ये बोलती है। कभी ये लिखती है तो कभी ये इशारा (संकेत) करती है। भाषा के मुख्यतः तीन रूप होते हैं। 

          भाषा के मुख्य तीन रूप

  1. मौखिक भाषा- बोलना (Verbal Language

  1. लिखित भाषा- लिखना (Written Language)

  1. सांकेतिक भाषा- इशारा करना (Sign Language)

उपरोक्त भाषा के मुख्य तीन रूप जाने माने प्रसिद्ध हैं। जिनकी विस्तार से चर्चा हम आगे करने वाले हैं। भाषा के रूपों से अभिप्राय यह है कि इन तीन रूपों में हम अपनी भाषा को प्रकट कर सकते हैं- मौखिक, लिखित व सांकेतिक। 

ऐंसा भी नहीं है कि भाषा के केवल यही तीन रूप हैं। इसके अतिरिक्त भी भाषा के विभिन्न रूप पाए जाते हैं। समय बदल रहा है, देश बदल रहा है, हम बदल रहे हैं, आप बदल रहे हैं तो फिर भाषा के रूप क्यों न बदले।


मौखिक भाषा किसे कहते हैं- Maukhik Bhasha Kise Kahate Hain

भाषा किसे कहते हैं- यह तो हमने पहले ही बता दिया है लेकिन जैंसे कि आपको स्पष्ट हो गया भाषा को अलग-अलग प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है। उनमें से एक प्रकार मौखिक भाषा भी है। जैंसे कि शब्द से ही साफ पता चल रहा है- मौखिक। 

मौखिक का अर्थ होता है- मुख से बोली जाने वाली भाषा। इसका सीधा सीधा मतलब यह हुआ कि हमारी बोल चाल वाली भाषा व्यावहारिक भाषा ही मौखिक भाषा है। मौखिक भाषा को अंग्रेजी में Verbal Language कहा जाता है। 

Maukhik Bhasha वह भाषा होती है, जिसमें हम अपने विचारों को परस्पर बोलकर एकदूसरे के समक्ष प्रकट करते हैं। 


मौखिक भाषा किसे कहते हैं उदाहरण सहित

मौखिक भाषा किसे कहते हैं- आइये उदाहरण सहित समझिए। मौखिक भाषा उसे कहते हैं- जिसमें हम अपने विचारों को वाणी के माध्यम से अर्थात् बोलकर के दूसरे तक पहुंचाते हैं और दूसरा व्यक्ति हमारे विचारों को सुनकर समझता है। उदाहरण के लिए- 


लिखित भाषा किसे कहते हैं- 🤔 Likhit Bhasha Kise Kahate Hain

लिखित भाषा में व्यक्ति अपने विचारों को लिखकर प्रकट करता है।जैंसे कि लिखित शब्द से ही पता चल जाता है कि इस प्रकार की भाषा में लिखकर के अपने भावों को प्रकट किया जाता होगा। 

लिखित भाषा को अंग्रेजी में Written Language कहा जाता है। आइये, लिखित भाषा को उदाहरण सहित समझते हैं।


लिखित भाषा किसे कहते हैं- उदाहरण सहित

लिखित भाषा उसे कहते हैं, जिस भाषा में हम अपने मन के विचारों को परस्पर एक दूसरे तक लिखकर प्रकट करते हैं। उदाहरण के लिए- किताबें लिखना, पत्र लिखना, समाचार पत्र लिखना आदि।

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सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं- 🤔 Sanketik Bhasha Kise Kahate Hain

सांकेतिक भाषा एक अत्यन्त रोचक भाषा होती है। नाम से ही अर्थ स्पष्ट हो जाता है कि जिस भाषा में व्यक्ति अपने विचारों को संकेतो के माध्यम से प्रस्तुत करता है, उसे सांकेतिक भाषा कहते हैं। 

संकेत शब्द से ही सांकेतिक बनता है, जो कि संस्कृत का शब्द है। सांकेतिक भाषा को अंग्रेजी में Sign Language कहते हैं। आइये, सांकेतिक भाषा को और अधिक सरलता से समझने के लिए उदाहरण सहित देखते हैं।


सांकेतिक भाषा किसे कहते हैं- उदाहरण सहित

सांकेतिक भाषा उसे कहते हैं, जिसमें हम अपने विचारों को संकेतो के माध्यम से प्रकट करते हैं। उदाहरण के लिए- आंख मारना, व्हाटसप आदि पर इमोजी भेजना आदि। 

एक उदाहरण को सरलता से समझिए- कोई सुन्दर सी खूबसूरत लडकी यदि आपको बार-बार प्रेम से देखती रहे तो आप तुरन्त समझ जाते हैं कि शायद वह मुझसे प्रेम करती है। 

इसी को सांकेतिक भाषा कहते हैं। व्हाटसप पर आज - रोने से लेकर हंसने,खाने-पीने, सोने,नाचने आदि तरह तरह के इमोजी भेजे जाते हैं। यह एक सांकेतिक भाषा का बेहतरीन उदाहरण है।


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भाषा के अनेक प्रकार (Bhasha Ke Anek Prakar)

अभी तक हमने चर्चा की- भाषा के कितने रूप होते हैं। अब हम भाषा के प्रकारों की बात करेंगे। प्रकार से यंहा अभिप्राय है कि भाषा के अनेक स्वरूप। भाषा के अनेकानेक स्वरूप देखने को मिलते हैं। 

इसके लिए ही विद्वानों भाषाविज्ञान के आधार पर विश्व की भाषाओं को अलग-अलग तरीकों से प्रतिपादित किया। यंहा हम भाषा के कुछ मुख्य प्रकार अथवा स्वरूपों का विवेचन करेंगे। जैंसे कि

          भाषा के कुछ प्रसिद्ध प्रकार

  • मातृभाषा (Matra Bhasha)

  • मशीनि भाषा (Machine Language)

  • सांकेतिक भाषा (इशारा करना)

  • राज भाषा (Raj Bhasha)

  • मानक भाषा (Manak Bhasha)

  • राष्ट्रभाषा (Rashtra Bhasha)

  • सम्पर्क भाषा (Samapark Bhasha)

उपरोक्त इन सभी भाषा के प्रकारों की संक्षेप में चर्चा नीचे की जा रही है। तो आइये, जानते हैं- भाषा के प्रकारों को एक-एक करके।


मातृभाषा किसे कहते हैं 🤔- Matra Bhasha Kise Kahate Hain

मातृभाषा भी भाषा का एक अन्य प्रकार है। मातृभाषा को अंग्रेजी में Mother Tongue कहा जाता है। मातृभाषा शब्द संस्कृत से लिया गया है। इसका सीधा सीधा अर्थ होता है- माता-पिता आदि परम्परा से चली हुई भाषा। 

जब व्यक्ति का जन्म होता है उसका पहला गुरु उसकी माता होती है। घर परिवार एवं उसके आसपास परिवेश में जो भाषा बोली जाती है, व्यक्ति पर जन्म के बाद सबसे पहले उसी भाषा का प्रभाव पड़ता है। 

उदाहरण के लिए जब बच्चा छोटा सा होता है- तो यदि वह उत्तराखण्ड गढवाल में जन्म लेता हो तो घर परिवार के परिवेश से वह गढवाली ही सीखने व बोलने लग जाता है। मां, मिते कुरकुरा लौ (मम्मी मेरे लिए कुरकुरा लाओ)

इस प्रकार हम कह सकते हैं- व्यक्ति जन्म से जिस भाषा को सीखता व बोलता है उसे ही मातृभाषा कहते हैं। जन्मस्थान जन्मभूमि से वह सबसे पहले जिस भाषा का प्रयोग करना शुरु करता है। वह भाषा उस व्यक्ति की मातृभाषा कहलाती है। 


मशीनी भाषा किसे कहते हैं (Machine Bhasha Kise Kahate Hain)

इंसान को जो भाषा साधारण रूप से समझ में न आए, जो भाषा कम्प्यूटर आदि तकनीकी के लिए ही बनायी गयी हो- उसे मशीनि भाषा कहते हैं। मशीनी भाषा को अंग्रेजी में Machine Language कहते हैं। 

कम्प्यूटर या अन्य मशीनी उपकरण जिस भाषा को समझते हैं, प्रयोग करते हैं- उसे मशीनी भाषा कहते हैं। उदाहरण के लिए कम्प्यूटर की Machine Language जिसमें केवल दो अक्षरों या नम्बरों का इस्तेमाल किया जाता है- 0 और 1 

यदि आपको कोई खाना खाने के लिए बुलाने के लिए कहे कि- 001010100 " आप इस नम्बर से भला क्या समझ पाएंगे, कुछ नहीं। इसी को मशीनि भाषा कहते हैं।


इसके अन्य उदाहरण- HTML, Java, CSS आदि हैं। अगर किसी को उसकी गर्लफ्रेंड HTML Language में कहे कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ- <html>Body [<मैं; = तुमसे >/<html/>BodyTag 1["बहुत"]<HTML etc / प्यार करती हूँ/> 

ऐंसी भाषा में जब किसी की गर्लफ्रेंड उसे प्रेम के लिए कहेगा तो जरूर उसका प्रेमी उसका सर फोडेगा और कहेगा बड़ी आयी अंग्रेज़न। निष्कर्ष यह है कि इसे ही मशीनि भाषा कहते हैं। 


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राज भाषा किसे कहते है (Raj Bhasha Kise Kahate Hain)

राज भाषा शब्द से आप शायद इसका अर्थ समझ गये होंगे। राजा को रानी से प्यार हो गया! राजा अथवा राजकाज की जो भाषा होती है, उसे राज भाषा कहते हैं। जिस भाषा में राजकाज सम्बंधित कार्य होते हैं। 

दूसरे शब्दों में कहें कि राजभाषा एक ऐंसी भाषा होती है जिसमें सरकार के अथवा किसी राजा के राज्य के आधिकारिक कार्य किए जाते हैं। आइये, राजभाषा किसे कहते हैं- उदाहरण सहित समझिए। राजभाषा सार्वकारिक कार्यों की भाषा होती है। 

उदाहरण के लिए वर्तमान में भारत सरकार के सरकारी कार्य प्रायः हिंदी भाषा में होते हैं। अतः भारत की राजभाषा हिंदी हुई। इसमें भी कदाचित् अलग-अलग राज्य अपनी अलग अलग-अलग राजभाषा का प्रयोग करते हैं। 


मानक भाषा किसे कहते हैं (Manak Bhasha Kise Kahate Hain)

कुछ प्रिय जन कहते हैं कि टकसाली भाषा किसे कहते हैं- आपकी बता दें कि मानक भाषा को हीटकसाली भाषा भी कहा जाता है। अब यह समझना जिज्ञासापूर्ण हो जाता है कि मानक भाषा क्या है, मानक भाषा किसे कहते हैं- तो आइये, समझते हैं-

मानक भाषा एक ऐंसी भाषा होती जो अपने विशिष्ट मानकों के लिए जानी जाती है। मानक का अभिप्राय है- विशिष्ट व्याकरण, निश्चित नियम व स्वरूप वाली भाषा। 

मानक भाषा वह होती है, जिसका व्याकरण सुव्यवस्थित होता है, जो भाषा एक शिक्षित वर्ग के लिए प्रयोग करने योग्य होती है। आइये, मानक भाषा को सरलता से समझने के लिए- मानक भाषा किसे कहते हैं- उदाहरण सहित समझते हैं।

मानक भाषा एक परिनिष्ठित,व्यवस्थित, व्याकरण से युक्त, शिक्षित वर्ग हेतु प्रयोज्य भाषा होती है। उदाहरण के लिए- हिंदी,  संस्कृत, अंग्रेजी आदि। इन भाषाओं का अपना एक व्यवस्थित व प्रसिद्ध स्वरूप देखने को मिलता है। अतः ये मानक भाषा कहलाती हैं।


राष्ट्रभाषा किसे कहते हैं (Rashtra Bhasha Kise Kahate Hain)

राष्ट्र भाषा शब्द से राष्ट्र भाषा की परिभाषा स्पष्ट समझ में आ जाती है। किसी भी देश में जो भाषा अधिक से अधिक बोली जाए, अधिक पढी जाए, अधिक लिखी जाए- उस भाषा को उस देश की राष्ट्रभाषा कहा जाता है। 

राष्ट्रभाषा उसे कहते हैं, जो उस राष्ट्र की पहचान बताती है। महात्मा गांधी ने राष्ट्र भाषा को राष्ट्र की आत्मा कहकर पुकारा है। आइये, राष्ट्र भाषा को एक उदाहरण से समझिए- किसी भी देश की राष्ट्रभाषा उस देश की अधिकाधिक जनसंख्या के द्वारा बोली व पढी जाती है। 

उदाहरण के लिए- भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी है क्योंकि हिंदी सम्पूर्ण भारत में अधिकांश बोली और समझी जाती है। अतः हिंदी भारत की राष्ट्रभाषा है।


सम्पर्क भाषा किसे कहते हैं (Sampark Bhasha Kise Kahate Hain)

सम्पर्क भाषा का सीधा सीधा अर्थ होता है- सम्पर्क कराने वाली भाषा, जोड़ने वाली भाषा। सम्पर्क भाषा उसे कहते हैं जो भाषा किसी एक समाज को दूसरे समाज से जोडने का काम करती है, जो भाषा किसी एक देश को दूसरे देश से जोडने का काम करती है। आइये, सम्पर्क भाषा को उदाहरण सहित समझते हैं- 

Sampark Bhasha Kise Kahate Hain- With examples

वह भाषा जो एक समाज अथवा देश को दूसरे समाज या देश से जोड़ती है- सम्पर्क भाषा कहलाती है। उदाहरण के लिए- अंग्रेजी। अंग्रेजी एक सम्पर्क भाषा का पूर्ण प्रतिनिधित्व करती है। 

जैंसे कि आप अपनी प्रेमिका के साथ में अमेरिका घूमने गये। अमेरिका तो चले गये, पर आपको अंग्रेजी का ABCD कुछ भी नहीं आता। जब आप अमेरिका पहुँचेंगे और आपको अंग्रेजी का A भी पता न हो तो शायद पहुँचने के बाद प्रेमिका या प्रेमी के साथ एयरपोर्ट पर ही भूखे पड़े रहेंगे। 


कारण यह है कि आपको वंहा की सामान्य भाषा का ज्ञान नहीं। अंग्रेजी यदि आपको आती होगी तो आप अमेरिका जाकर खूब सैर करेंगे/करेंगी। आपको कोई भी समस्या नहीं होगी। 

यंहा पर ध्यातव्य यह है कि अंग्रेजी भाषा आपके अमेरिका जाने पर सम्पर्क भाषा का कार्य करती है। आपको अमेरिकी गोरे सफेद लोगों से से जोडने का काम करती है। 

इसी को सम्पर्क भाषा कहते हैं। सम्पर्क भाषा कोई भी हो सकती है, जो किसी को किसी से जोड़ दे। जुड़ा लिया है, तुमने जो दिल को। अमरिका जाने पर जो सनम। बिन भाषा के कैंसे वंहा। सैर करेंगे हम दो सनम।।


भाषा किसे कहते हैं Class 1, Class 2, Class 3, Class4, Class 5, Class 6 आदि प्राथमिक कक्षाओं से लेकर विभिन्न उच्चतर कक्षाओं में यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है। सभी कक्षाओं को ध्यान में रखते हुए भाषा किसे कहते हैं- भाषा की परिभाषा हमने विस्तारपूर्वक स्पष्टतः बताई। हमें उम्मीद है भाषा से सम्बंधित यह जानकारी आपको पसंद आयी होगी। धन्यवाद।


Bhasha Kise Kahate Hain- निष्कर्ष

भाषा किसे कहते हैं- यह विषय आपको बहुत ही अच्छे ढंग से समझ में आ गया होगा। ऐंसी हमें भाषा की आशा लग रही है। आज के इस - Bhasha Kise Kahate Hain लेख में हमने भाषा किसे कहते हैं- भाषा की परिभाषा (विभिन्न विद्वानों के अनुसार), भाषा के तीन रूप- मौखिक भाषा, लिखित भाषा, सांकेतिक भाषा, भाषा शब्द की उत्पत्ति, भाषा के बाह्य प्रकार- मातृभाषा, राजभाषा, सम्पर्कभाषा, राष्ट्रभाषा, मशीनिभाषा, मानक भाषा आदि का रोचक अध्ययन किया। 

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