Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain 🤔 | Samas Ke Bhed= समास के [भेद] | समास के कितने भेद होते हैं❓

Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain 🤔 (Samas Kitne Prakar Ke Hote Hain) समास के कितने भेद होतें हैं 🤔

मनुष्य की हमेशा से एक विशेष इच्छा रही है कि वह अपनी बात को संक्षेप में किसी दूसरे तक पहुंचा सके। किसी भी बात को पहुंचाने के लिए हमें शब्द की आवश्यकता पड़ती है। चाहे वह मौखिक शब्द हो, या फिर लिखित शब्द। 

अपनी बात अथवा शब्दों को संक्षेप में कहना ही समास कहलाता है। दूसरे शब्दों में यूं कहें कि लंबे-लंबे शब्दों को बिल्कुल सार्थक तरीके से छोटा करके कहना ही समास कहलाता है। इसी को हम यदि एक शब्द में  परिभाषित करें तो समास- संक्षिप्तीकरण को कहते हैं।

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जब हम किन्हीं दो- चार शब्दों को एक साथ मिला लेते हैं तो उनका सामुदायिक रूप समास कहलाता है। उदाहरण के लिए- राम-श्याम-गीता-सीता। यंहा रामश्यामगीतासीता एक साथ संक्षेप में कहा गया। इसी को यदि विस्तार से कहेंगे तो- राम और श्याम और गीता और सीता- इस प्रकार कहना पडेगा। 


चलिए, समास का एक शास्त्रीय उदाहरण भी देख लेते हैं- जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले। (शिवताण्डवस्तोत्र) यह मात्र एक ही शब्द है। यह भी सामासिक शब्द ही है। जिसको जोड़-जोड़ कर एक ही बना दिया गया। इसका यदि विग्रह करेंगे तो काफी बड़ा हो जाएगा। 

जैंसे कि- जटा= बाल, अटवी= जंगल, गलज्= बहता हुआ, जलप्रवाह= जल के प्रवाह से, पावितस्थले= पवित्र किए गये स्थल पर। इस प्रकार पूरा मिलाकर एक सामासिक रूप बना- जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले। 


इस पूरे एक शब्द का हिंदी अर्थ कुछ इस प्रकार बनेगा कि (भगवान  शंकर) की जटारूपी जंगल के बीच से निकलती हुई गंगा (जल) की धारा से पावित (पवित्र) स्थल पर = भगवान शंकर ने प्रचण्ड ताण्डव नृत्य किया। 

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अब आप खुद ही समझ सकते हैं कि समास की कितनी बड़ी शक्ति है जो कि इतनी लम्बी बात को सिर्फ एक वाक्य = जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले से ही पूरा कर देता है। अस्तु। अब चलिए, समास किसे कहते हैं यह तो जान लिए पर अब पुनः हम अपने विषय पर आते हैं। समास कितने प्रकार के होते हैं- Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain 🤔 

आज के इस पाठ में

  • समास की परिभाषा (Samas In Hindi)

  • समास के कितने भेद होते हैं ( Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain)

  • समास के मुख्य चार भेद

  • समास के अन्य प्रकार अथवा भेद

  • समास के भेदों का उदाहरण सहित स्पष्टीकरण

  • हमारे दर्शकों‌ द्वारा समास पर आधारित पूछे गये प्रश्न व उनका उत्तर


Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain 🤔 समास के भेद

समास के कितने भेद होते हैं- यह हमारा आज का मुख्य विषय है. समास कितने प्रकार के होते हैं। समास के सभी भेदों की विस्तार से आज हम चर्चा करेंगे। 

यहां हम समास के बारे में संस्कृत व हिंदी दोनों भाषा को ध्यान में रखते हुए समास के भेदों का उल्लेख करेंगे। क्योंकि देखा जाए तो संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। 

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हिंदी में जितने भी समास पाए जाते हैं या फिर अन्य भाषाओं में भी प्राय जितने भी समास के प्रकार देखने को मिलते हैं लगभग संस्कृत से ही अभिभूत हैं। 

Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain| समास के कितने भेद होते हैंं

अतः संस्कृत में समास के भेद कितने होते हैं? हिंदी में समास के भेद कितने होते हैं? इन दोनों का ध्यान रखते हुए सामुदायिक रूप से अच्छे ढंग से समास के कितने भेद होते हैं? 

(Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain) ये सारी बातें आज हम जानेंगे। तो चलिए सबसे पहले जानते हैं- समास की परिभाषा (Samas In Hindi)


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समास की परिभाषा (Samas In Hindi)

समास दो शब्दों को मिलाकर बना है। सम+अस (घञ् प्रत्यय) । यहां पर सम का मतलब है- संक्षेप कर देना। इस प्रकार समास शब्द का सीधा-सीधा अर्थ होता है- संक्षेप करना। 


किसी भी भाषा में जो बोलने के लिए शब्द प्रयुक्त होते हैं उनका संक्षिप्तीकरण ही समास कहलाता है। यह समास की सरल व सामान्य परिभाषा है। 

संस्कृत में समास की परिभाषा को बताते हुए व्याकरण के आचार्य- वरदराज कहते हैं- समसनं समासः। अर्थात् संक्षिप्तीकरण ही समास कहलाता है। 


तो मुझे लगता है समास किसे कहते हैं। यह आप अच्छे ढंग से समझ गये होंगे। अब जो हमारा आज का प्रमुख विषय है- समास के कितने भेद होते हैं? (Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain) समास कितने प्रकार के होते हैं इसकी चर्चा शुरु करते हैं,तो आइए जानते हैं- समास के भेद अथवा समास के प्रकार।


समास के कितने भेद होते हैं (Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain)

जब हम समास के भेदों की बात करते हैं तो समास के कई भेद देखने को मिलते हैं। हिंदी व संस्कृत दोनों में प्रायः समास एक ही समान हैं क्योंकि हिंदी के समास संस्कृत से ही लिए गए हैं। इस बात को आप स्वयं अनुभव भी कर सकते हैं। 



समास के मुख्यतः कितने भेद होते हैं

सबसे पहले हमें यही समझना होगा कि समास के मुख्य भेद कितने हैं- यह जानते हुए हम धीरे-धीरे समास की गहराई में डूबते जाएंगे। जिससे कि हमें समास को समझने में आसानी होगी। तो चलिए, सबसे पहले समास के मुख्यतः कितने भेद होते हैं- इसको समझ लेते हैं।


समास के मुख्यतः चार भेद होते हैं। यह चार भेद कुछ निम्न प्रकार से हैं- Samas Kitne Prakar Ke Hote Hain

मुख्यतः समास के चार भेद होते हैं (Samas Ke 4 Bhed / Prakar)

  • अव्ययीभाव समास (Avyayibhav Samas)

  • तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas)

  • द्वंद्व समास (Dwand Samas)

  • बहुव्रीहि समास (Bahuvrihi Samas)


ये उपरोक्त समास के मुख्य भेद हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि इसके अतिरिक्त समास के अन्य भेद नहीं पाए जाते। 

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इसके अलावा भी समास के कई भेद देखने को मिलते हैं जिनको कि हम अवांतर भेद के रूप में समझ सकते हैं। समास के कुछ अन्य भेद निम्न प्रकार से हैं-

समास के अन्य भेद अथवा प्रकार (Samas ke Anya Bhed)

  • केवल समास (Keval Samas)

  • द्विगु समास (Dvigu Samas)

  • कर्मधारय समास (Karmadharaya Samas)

  • उपपद समास (Uppad Samas)

  • प्रादि/गति समास (Pradi Samas)

  • नञ् तत्पुरुष समास (Nan Tatpurush Samas)
  • एकशेष समास आदि (Ekshes Samas)


इस प्रकार समास के उपरोक्त कुछ अन्य भेद भी हैं। अब हम समास के भेदों को तो जान चुके हैं लेकिन प्रत्येक समास के कितने भेद होते हैं तथा उनके क्या-क्या उदाहरण हैं? समास के कितने भेद होते हैं उदाहरण सहित इसको समझते हैं। 

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इसके साथ ही समास के भेद का चार्ट PDF भी आपको प्रदान करेंगे, तो आइए, समास के कितने भेद होते हैं उदाहरण सहित इसको जानने का प्रयास करते हैं।

Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain- Video Tutorial

नोट- उपरोक्त वीडियो में-हिंदी आचार्य इस यूट्यूब चैनल की मैडम जी ने समास के भेदों को बहुत ही सरलता से समझाया है। 


समास के कितने भेद होते हैं उदाहरण सहित बताइए (Samas Ke Bhed Udaharan Sahit)

समास के भेदों को हम पहले ही बता चुके हैं। अब यहां समास के भेदों को उदाहरण सहित बताने का प्रयास करेंगे। जिससे कि आप आसानी से इन सभी समास के प्रकारों को अपनी जीवनशैली में प्रयुक्त होने वाले शब्दों के साथ में जोड़ सकें और आसानी से समास को पहचान सकें।

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Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain (समास के भेद उदाहरण सहित)


समास का पहला भेद अथवा प्रकार-
अव्ययीभाव समास 

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में समास से संबंधित बहुत सारे प्रश्न पूछे जाते हैं। समास के भेदों या समास के प्रकारों से अथवा समास के उदाहरणों से परीक्षाओं में कापी प्रश्न पूछे गए हैं और निरंतर पूछे जाते हैं। 

इस दृष्टि से आपको समास के भेदों को तथा उदाहरणों को अच्छे ढंग से समझना चाहिए।  


समास का सबसे पहला भेद है- अव्ययीभाव समास इस समास में पहला पद अव्यय होता है। संस्कृत में अव्ययीभाव समास के बारें में कुछ इस प्रकार कहा गया- प्रायेण पूर्वपदार्थप्रधानः अव्ययीभावः। 

अर्थात जिस समास में अक्सर पहला पद प्रधान होता है उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। तो आइये, अब अव्ययीभाव समास को उदाहरण सहित समझते हैं-

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अव्ययीभाव समास के उदाहरण

यहां हम समास व समास के भेदों को जानेंगे। और हां, इन सभी भेदों को विस्तार से पढने के लिए अन्त में कुछ लिंक्स दिए गए हैं जिससे कि आप सभी समास के भेदों को अच्छे ढंग से विस्तार पूर्वक समझ सकते हैं। 
तो चलिए, अभी पहले यंहा अव्ययीभाव समास के उदाहरणों को समझते हैं-

  अव्ययीभाव समास के उदाहरण

  • निरोग ➡ रोग से रहित 

  • यथाशक्ति ➡ शक्ति के अनुसार

  • यथाभक्ति ➡ भक्ति के अनुसार

  • प्रत्यक्ष ➡ आंखों के सामने

  • परोक्ष ➡ आंखों से दूर


उपरोक्त सभी उदाहरण अव्ययीभाव समास के हैं। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इन सभी उदाहरणों में पहला पद अव्यय है। जैंसे कि यथाशक्ति में 'यथा' यह अव्यय है। 

यही इस समास की विशेषता है। इस विशेषता से इस समास को आसानी से समझा जा सकता है।

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समास का दूसरा भेद या प्रकार-
तत्पुरुष समास

तत्पुरुष समास में दूसरा पद प्रधान होता है। संस्कृत में कहा जाता है- "प्रायेण उत्तरपदप्रधानः तत्पुरुषः" अर्थात जिस समास में उतर पद प्रधान होता है उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। 


तत्पुरुष समास का एक उदाहरण देखिए- राजपुरुष। यंहा राजपुरुष इस शब्द में दूसरा पद यानि कि "पुरुष" शब्द प्रधान है। यहां पर राजा का पुरुष प्रधान है न कि राजा क्योंकि राजपुरुष का अर्थ होता है- राजा का पुरुष। 


अगर कोई कहे कि राजपुरुष को बुलाकर लाओ तो ऐंसी स्थिति में राजा के पुरुष को बुलाया जाएगा न कि राजा को। अर्थात पुरुष पद प्रधान है। तत्पुरुष समास के ऐंसे ही कुछ अन्य उदाहरण भी देखिए-

तत्पुरुष समास के उदाहरण

  • भूतबलि ➡ भूतों के लिए बलि

  • राजकुमार ➡ राजा का कुमार

  • कालिदासरचित ➡ कालिदास के द्वारा रची गया

  • गृहमंत्री ➡ घर का मंत्री

  • अटल ➡ जो कभी टाल ना सके
  • डाकखाना ➡ डाक के लिए घर


इस प्रकार उपरोक्त तत्पुरुष समास के उदाहरणों से यह स्पष्ट होता है कि तत्पुरुष समास में उत्तर पद प्रधान होता है। आइए, दूर मत जाइये- अब समास का अगला भेद समझते हैं।

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समास का तीसरा भेद या प्रकार-
द्वंद समास

द्वंद समास एक ऐंसा समास है जिसमें दोनों ही पद प्रधान होते हैं। संस्कृत में इसके लिए कहा जाता है- प्रायेण उभयपदार्थप्रधानः द्वंद्वः

अर्थात जिस समास में दोनों पदों की प्रधानता होती है उसे द्वंद समास कहा जाता है। उदाहरण के लिए राजा-रानी - यहां पर राजा और रानी दोनों शब्दों की प्रधानता है इसीलिए इसे द्वंद्व समास कहा जाता है।


इसकी एक और बड़ी विशेषता है कि इसमें "और" शब्द भी छिपा रहता है जैंसे कि राजा-रानी में राजा और रानी- यह "और" शब्द भी छिपा है। तो आइए, इसके कुछ अन्य उदाहरण जानते हैं-

द्वंद्व समास के उदाहरण

  • रात्रिदिन ➡ रात और दिन

  • प्रातः सांय ➡ सुबह और शाम

  • अंदरबाहर ➡ अंदर और बाहर

  • सुखदुःख ➡ सुख और दुख

  • भ्राताभगिनी ➡ भाई और बहन
  • हमतुम ➡ हम और तुम
  • प्रेमीप्रेमिका ➡ प्रेमी और प्रेमिका


उपरोक्त द्वंद्व समास के सभी उदाहरणों को देखने से यह पता चलता है कि द्वंद समास में दोनों पदों की प्रधानता होती है। जैंसे कि सुखदुःख में सुख और दुःख दोनों की प्रधानता है। 

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सरलता से समझने के लिए- द्वंद्व समास का एक आधुनिक उदाहरण देखिए- गर्लफ्रेंडब्वाइफ्रेंड- यंहा दोनों पदों की प्रधानता है। समझने में आसानी हो अतः यह उदाहरण दिया गया। 

इसको अन्यथा न लें। अब आइये, समास के अगले व अन्तिम भेद को समझते हैं उदाहरण सहित-



समास का आखिरी भेद
बहुव्रीहि समास

बहुव्रीहि समास के विषय में कहा जाता है कि बहुव्रीहि समास में कोई अन्य अर्थ प्रधान होता है। संस्कृत में बहुव्रीहि समास के बारे में कुछ इस प्रकार कहा गया है- प्रायेण अन्यपदार्थप्रधानो बहुव्रीहिः।


अर्थात् जिस समास में कोई अन्य अर्थ प्रदान हो उसे बहुव्रीहि समास कहते हैं। उदाहरण के लिए- गजानन। गजानन में दो पद हैं गज + आनन। 


यहां पर न तो गज का अर्थ प्रधान है और न ही आनन का, बल्कि दोनों को मिलाने से यहां पर भगवान गणेश का अर्थ प्रधान है। 

अतः अन्य अर्थ की प्रधानता होने के कारण इसे बहुव्रीहि समास कहा जाता है। बहुव्रीहि समास के अन्य उदाहरणों को देखिए व समझिबहु

बहुव्रीहि समास के उदाहरण

  • रमावल्लभ ➡ रमा (लक्ष्मी) के प्रिय- विष्णु

  • पार्वतीवल्लभ ➡ पार्वती के प्रिय भगवान- शंकर

  • देवेंद्र ➡ देवताओं के राजा- इंद्र

  • दशानन ➡ दस मुख वाला- रावण

  • माखनचोर ➡ मक्खन चुराने वाली- कान्हा
  • बाहुबली ➡ बाहु में है बल जिसका-धृतराष्ट्र


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बहुव्रीहि समास के उपरोक्त उदाहरणों को देखने से यह ज्ञात होता है कि बहुव्रीहि समास में दोनों पदों को छोड़कर कोई तीसरा अर्थ प्रधान होता है। 


जैंसे कि रमावल्लभ में न तो रमा का अर्थ प्रधान है और न ही वल्लभ का अर्थ प्रधान है, अपितु रमावल्लभ कहने से भगवान विष्णु का बोध होता है। 

रमावल्लभ अर्थात रमा (लक्ष्मी) के प्रिय भगवान विष्णु। इस प्रकार अन्य सभी उदाहरणों को देखने से यह स्पष्टतः समझ में आ जाता है।


यहां हमने समास के कितने भेद होते हैं (Samas Ke Kitne Bhed Hote Hain)  समास कितने प्रकार के होते हैं- इन सभी विषयों की विस्तारपूर्वक चर्चा की। 

प्रत्येक समास के कितने भेद होते हैं? उनके कितने उदाहरण होते हैं? उनके क्या-क्या नियम हैं- इत्यादि विषयों को समझने के लिए आप हमारी इस वेबसाइट के मुख्य पेज पर जा सकते हैं। अथवा इस लेख के नीचे दिए गये लिंक के माध्यम से भी आसानी से पढ सकते हैं। 

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यहां हमारे प्रिय दर्शकों ने समास से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जिनका प्रश्न सहित उत्तर नीचे दिया गया है। ये आपके ज्ञान में जरूर वृद्धि करेंगे और चार चांद लगाएंगे। अतः नीचे दिए इन सभी प्रश्नों को जरूर देखें व पढें-


हमारे प्रिय दर्शकों द्वारा समास से सम्बंधित पूछे गये प्रश्न- FAQs


  • गांधी महोदय में कौन सा समास है?
रश्मि शुक्ला ने जी यह प्रश्न पूछा कि गांधीमहोदय में कौन सा समास है। आपको बता दें कि गांधीमहोदय में कर्मधारय समास है। गांधीमहोदय अर्थात् गांधी हैं ये महोदय। इस प्रकार इस समास का विग्रह होगा।


  • आन बान शान में कौन सा समास है?
किसी प्रिय दर्शक ने यह प्रश्न पूछा कि- आन बान शान में कौन सा समास है? आनबानशान - यहां पर द्वंद्व समास है। अर्थात तीनों पदों की प्रधानता है। आन और बान और शान। तीनों का सामासिक रूप हुआ- आनबानशान। इस प्रकार इस व्यावहारिक शब्द में द्वंद समास हुआ।


  • पकवान का समास प्रकार
पकवान का समास प्रकार क्या है- रेणुका झा जी ने यह प्रश्न पूछा। आपको बता दें पकवान को संस्कृत में पक्वान्नम् कहा जाता है। पकवान (पक्वान्नम्) अर्थात अच्छे ढंग से स्वादिष्ट पका हुआ अन्न। उसे ही पकवान कहते हैं। पकवान में कर्मधारय समास है। पका हुआ है वो अन्न उसे कहते हैं- पकवान (पक्वान्नम्)।


  • ब्रह्माधीत में कौन सा समास है
हमारी प्रियदर्शिका के द्वारा पूछा गया प्रश्न- ब्रह्माधीत में कौन सा समास है- ब्रह्माधीत अर्थात ब्रह्मा के द्वारा अधीत या पढ़ा गया। ब्रह्माधीत में तत्पुरुष समास है। तत्पुरुष में भी तृतीया तत्पुरुष समास है। ब्रह्मा के द्वारा पढा गया। यंहा "के द्वारा" तृतीया विभक्ति का चिन्ह है। अतः इस प्रकार ब्रह्माधीत में तृतीया तत्पुरुष समास है।

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  • जलापूर्ति Ka SAMAS vigrah in Hindi
किसी ने कहा जलापूर्ति Ka SAMAS vigrah in Hindi अर्थात् हिंदी में जलापूर्ति का समास विग्रह क्या होगा- तो आपको बता दें कि- जल के द्वारा आपूर्ति = जलापूर्ति। यहां पर भी तत्पुरुष समास है। इसका विग्रह है - जल से आपूर्ति या जल की आपूर्ति= जलापूर्ति।


  • अर्थ की दृष्टि से समास के भेद
किसी महानुभाव ने यह पूछा था कि अर्थ की दृष्टि से समास के भेद कितने होते हैं? आप सभी की जानकारी के लिए आपको बताना चाहेंगे कि समास विवक्षा के अधीन होता है। अर्थात आप कहना क्या चाह रहे हैं- इस पर निर्भर होता है। 

जैंसे कि अखंड शब्द कहने से हम एक ओर बहुव्रीहि समास भी ग्रहण कर सकते हैं। वंही दूसरी ओर नञ् तत्पुरुष समास भी समझ सकते हैं। अतः समास कहने की इच्छा पर भी निर्भर होता है।


  • विश्वंभर में तत्पुरुष समास का भेद होगा
किसी ने कहा- विश्वंभर में तत्पुरुष समास का भेद होगा- आपको बता दें कि विश्वंभर में तत्पुरुष समास का - उपपद भेद है। विश्व को भरने वाला विश्वंभर होता है। उपपद तत्पुरुष समास

यहां किसी अन्य अर्थ की प्रधानता हो सकती है लेकिन जब तत्पुरुष की बात करें तो विश्वंभर में उपपद तत्पुरुष समास है। विश्वं भरतीति विश्वंभरः। (विश्व को भर देने वाला)

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  • षोडश संस्कार में कौनसा समास है
मानसी मिश्रा जी ने पूछा कि- षोडश संस्कार में कौन सा समास है। इसका सीधा-सीधा उत्तर है- तत्पुरुष समास का भेद द्विगु समास। ध्यान रहे समास हमेशा विवक्षा पर निर्भर होता है। अतः एक जगह कोइ दूसरा समास भी बनाया जा सकता है।


  • अखंड में समास कौन सा है?
अखंड में समास कौन सा है- किसी ने यह प्रश्न पूछा। जी, अखंड में नञ् तत्पुरुष समास है। साथ ही विवक्षा के अनुसार बहुव्रीहि समास भी किया का सकता है। अखंड अर्थात जिसका खंड नहीं है। जिसके टुकड़े नहीं किए जा सकते हैं।


  • पंचकुइयां में समास कौन सा है, संस्कृत में
मनोहर जी ने प्रश्न पूछा था- जी, पंचकुइया में समास कौन सा है संस्कृत में- पंचकुइया में द्विगु समास है। पांच कुंओं का समूह ही पंचकुइया कहलाता है। इस प्रकार द्विगु समास समझना चाहिए।

इस प्रकार हमारे प्रिय दर्शकों द्वारा- समास के कितने भेद हैं, समास कितने प्रकार के होते हैं, समास से संबंधित कुछ विशेष प्रश्न पूछे गए थे जो कि आपने ऊपर देखे। यदि आपका भी किसी प्रकार का प्रश्न हो तो आप नीचे कमेंट बक्से में अपना प्रश्न रख सकते हैं ताकि अगले लेख में आपका प्रश्न भी पिक अप किया जाए।

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इन सभी समास के भेदों को अथवा समास के उदाहरणों को विस्तार पूर्वक समझने के लिए आप हमारी वेबसाइट के मुख्य पेज पर जा सकते हैं अथवा नीचे दिए गए लिंक के माध्यम से भी विभिन्न परीक्षा सामग्री व रोचक विषयों का आनंद ले सकते हैं। धन्यवादः।

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