Vat Savitri Vrat Mantra, Puja Mantra | Vat Savitri Vrat Niyam, वट सावित्री व्रत मंत्र व पूजा नियम
प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को वट सावित्री व्रत मनाया जाता है। यह व्रत स्त्रियों के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है।
जो स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु चाहती हैं, अपने जीवन में सुख-शांति पाना चाहती हैं और पारिवारिक जीवन में समृद्धि चाहती हैं, उन्हें वट सावित्री का व्रत जरूर रखना चाहिए।
वट सावित्री व्रत के कुछ विशेष नियम हैं। यदि आप उनका सही से पालन करते हैं, तो आपको वट सावित्री व्रत रखने का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
इसके अलावा, वट सावित्री व्रत के दिन कुछ विशेष मंत्र होते हैं, जिनका जाप करना चाहिए।
यहां वट सावित्री व्रत के मंत्र, वट सावित्री व्रत विधि, व्रत पूजा के मंत्र और वट सावित्री व्रत के कुछ महत्वपूर्ण नियम बताए जा रहे हैं। आइए जानते हैं।
वट सावित्री व्रत क्यों मनाया जाता है
आपने वट सावित्री व्रत की कथा जरूर सुनी होगी। सत्यवान और सावित्री की कथा भला किसने नहीं सुनी होगी।
यह कथा हमें बचपन में दादा-दादी भी सुनाया करते थे और समाज में सावित्री की कथा बहुत प्रसिद्ध है। सावित्री को एक पतिव्रता स्त्री का अद्वितीय उदाहरण माना जाता है।
सावित्री वही नारी थीं, जो यमराज से अपने पति के प्राणों को वापस ले आई थीं। ऐसी महान नारी को शत-शत नमन है। वट सावित्री व्रत की कथा, सावित्री का यमराज से अपने पति के प्राणों को वापस लाने के संबंध में है।
यह कथा पुराणों से ली गई है। विशेष बात यह है कि सावित्री जी व्रत के प्रभाव से मृत्यु के देवता यमराज से अपने पति के प्राणों को वापस लाई थीं।
इस व्रत का नाम वट सावित्री व्रत है। इसी से आप इस व्रत की महिमा का अनुमान लगा सकते हैं। तभी से यह वट सावित्री व्रत मनाया जाता है।
वट सावित्री व्रत क्यों मनाया जाता है, इसके कुछ मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं।
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वट सावित्री व्रत के फायदे
यहां हम आपको वट सावित्री व्रत का मंत्र बताएंगे। उससे पहले वट सावित्री व्रत के फायदे जान लीजिए।
यदि आप सही नियमपूर्वक वट सावित्री व्रत रखते हैं, आहार का ध्यान रखते हैं, फलाहार का विशेष ध्यान रखते हैं एवं अन्य सभी बातों का ध्यान रखते हुए व्रत-उपवास को संपन्न करते हैं, तो आपको यह लाभ मिलते हैं।
- पति की आयु लंबी होती है।
- वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है।
- परिवार में खुशहाली आती है।
- घर में समृद्धि एवं वैभव बढ़ता है।
- पारिवारिक क्लेश दूर होता है।
- पति-पत्नी के संबंधों में मिठास आती है।
- संतान के लिए शुभ फलदायक है।
वट सावित्री व्रत मंत्र
सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि यदि आप पूरे दिन भर वट सावित्री व्रत रखते हैं, तो इस दिन आपको कुछ विशेष मंत्रों का जाप अवश्य करना चाहिए।
वट सावित्री व्रत के मंत्र, वट सावित्री पूजा के मंत्र, Vat Savitri Sankalp Mantra, Vat Savitri Purnima Mantra, वट सावित्री पूर्णिमा व्रत एवं वट सावित्री के दिन वट वृक्ष में परिक्रमा लगाने के मंत्र आदि बहुत से मंत्रों के बारे में आपको पता होना चाहिए।
वट सावित्री मंत्र जाप
ॐ सतीसावित्र्यै नमः
यह वट सावित्री व्रत के दिन किया जाने वाला सबसे प्रभावशाली मंत्र जाप है। जो स्त्री 108 बार अथवा उससे अधिक इस मंत्र का जाप करती है, उसे मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। ऐसा शास्त्रों में उल्लेख पाया जाता है।
वट सावित्री व्रत का दूसरा मंत्र
ॐ वटसावित्र्यै नमः
यह मंत्र भी वट सावित्री व्रत के दिन जप सकते हैं। यह भी अत्यंत चमत्कारिक और प्रभावशाली माना जाता है। शुद्ध एवं पवित्र अवस्था में वट सावित्री पूजन करने के पश्चात इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
ॐ सौभाग्यदायिन्यै नमः
यह भी वट सावित्री व्रत का अचूक मंत्र है, जिसका उल्लेख शास्त्रों में विशेष रूप से किया गया है। इससे स्त्रियों को सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
वट सावित्री व्रत अर्घ्य मंत्र
जब आप वट सावित्री की पूजा करते हैं, तो बरगद यानी वटवृक्ष के सामने अर्घ्य देते समय इस मंत्र का उच्चारण अथवा जाप अवश्य करना चाहिए।
अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तु ते॥
इस मंत्र में यह बोला गया है कि हे मां सती सावित्री देवी, मुझे सौभाग्य होने का वरदान दीजिए और मेरे पुत्र-पौत्र आदि सुखमय जीवन व्यतीत करें एवं मेरे घर में सुख-संपत्ति की वृद्धि हो। अतः आपको नमस्कार है, इस अर्घ्य को ग्रहण कीजिए।
वट सावित्री व्रत परिक्रमा मंत्र
जब आप वट सावित्री व्रत के दिन वटवृक्ष की परिक्रमा लगाते हैं, तो उस दौरान इन मंत्रों का जाप करना चाहिए।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
ॐ वैवस्वताय नमः।
वट सावित्री व्रत के दिन परिक्रमा के समय कच्चा धागा अथवा कलावा लेकर वटवृक्ष की परिक्रमा लगानी चाहिए।
बहुत लोगों का प्रश्न होता है कि वट सावित्री में कितनी परिक्रमा करनी चाहिए? सामान्यतः 7, 11, 21 अथवा 108 परिक्रमा लगाई जाती हैं।
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वट सावित्री वटवृक्ष प्रार्थना मंत्र
जब आप वट सावित्री वटवृक्ष के सामने अर्थात बरगद के पेड़ के सामने पूजा करते हैं, तो प्रार्थना के कुछ विशेष मंत्र हैं। इनमें से यह मंत्र विशेष उल्लेखनीय है। इसका पाठ अथवा जाप अवश्य करना चाहिए।
यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मां सदा॥
इस मंत्र में बोला गया है कि हे वृक्षराज, मेरे घर में सुख-संपत्ति की वृद्धि करो। जिस तरह तुम्हारी शाखाएं फैली हुई हैं, उसी तरह मेरे घर में भी पुत्र-पौत्र, धन-धान्य की वृद्धि हो।
वट सावित्री व्रत के नियम
वट सावित्री व्रत के कुछ विशेष नियमों का सही से पालन करने पर ही इस व्रत का फल मिलता है। यह नियम इस प्रकार हैं।
- स्नान व श्रृंगार
सुबह उठकर सबसे पहले स्नान आदि क्रियाएं कर लें। स्वच्छ वस्त्र पहनें और यथाशक्ति 16 श्रृंगार करें।
- वट सावित्री पूजा विधि
वट सावित्री व्रत के नियम के अंतर्गत पूजा विधि का विशेष महत्व है। बरगद के वृक्ष के पास जाकर उसे जल एवं अर्घ्य अर्पित करें। रोली, मौली, कुमकुम, धूप, दीप आदि से उसकी पूजा करें।
उसके बाद बरगद के पत्तों में सुंदर नैवेद्य अर्थात प्रसाद भोग चढ़ाएं। बहुत लोग पूछते हैं कि वट सावित्री पूजन में क्या-क्या लगता है? अथवा vat savitri puja mein kya kya lagta hai? इसकी जानकारी नीचे दी गई है।
- वट सावित्री व्रत परिक्रमा
वट सावित्री व्रत के दिन परिक्रमा का विशेष महत्व है। वृक्ष के चारों ओर सफेद धागा अथवा कलावा लपेटते हुए परिक्रमा लगानी चाहिए।
परिक्रमा 108 अथवा उससे ज्यादा भी लगा सकते हैं या कम से कम सात परिक्रमा जरूर लगानी चाहिए।
परिक्रमा के समय Vat Savitri Purnima Mantra अथवा वट सावित्री परिक्रमा मंत्र जरूर बोलना चाहिए।
- वट सावित्री व्रत कथा सुनना
वट सावित्री व्रत का यह अभिनव अंग है। इस दिन वट सावित्री व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए।
आप चाहे तो वट सावित्री व्रत कथा पढ़ भी सकते हैं अथवा मोबाइल अथवा अन्य यंत्रों के माध्यम से सुन सकते हैं।
आजकल बहुत लोग Vat Savitri Vrat Katha PDF भी डाउनलोड करके पढ़ते हैं।
वट सावित्री व्रत कैसे करते हैं
बहुत लोगों का प्रश्न रहता है कि वट सावित्री व्रत कैसे करते हैं। सबसे पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
फिर वटवृक्ष की पूजा करें, परिक्रमा लगाएं, मंत्र जाप करें एवं वट सावित्री व्रत कथा सुनें। अंत में दान-पुण्य करके व्रत का समापन करें।
पति एवं सास का सम्मान करना
वट सावित्री व्रत के दिन अपने पति का विशेष सम्मान करना चाहिए। इसके अतिरिक्त अपनी सास एवं पारिवारिक लोगों का भी विशेष आशीर्वाद लेना चाहिए। अपने पति के पैर छूने चाहिए। सास का भी खूब आदर करना चाहिए।
वट सावित्री व्रत दान
वट सावित्री व्रत के दिन दान का भी विशेष महत्व है। गरीब लोगों को उनकी जरूरतमंद चीजों का दान करना चाहिए। आप चाहे तो भंडारा भी करवा सकते हैं या किसी मंदिर में आवश्यक सामग्री का दान कर सकते हैं।
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वट सावित्री व्रत सामग्री | Vat Savitri Vrat Samagri
वट सावित्री के दिन पूजा में क्या-क्या सामान लगता है, इसकी पूरी लिस्ट यहां दी जा रही है। आप इस सामान को घर बैठे ऑनलाइन भी मंगवा सकते हैं।
Vat Savitri Vrat 2026 Puja Vidhi एवं Vat Savitri Vrat Muhurta 2026 के अनुसार भी यह सामग्री उपयोगी मानी जाती है।
बहुत लोग पूछते हैं कि वट सावित्री पूजा में क्या-क्या सामग्री लगती है? तथा वट सावित्री पूजा में कौन-कौन से फल लगते हैं? तो ऊपर दी गई सूची में इसकी संपूर्ण जानकारी दी गई है।
वट सावित्री व्रत का दूसरा नाम
विभिन्न राज्यों में वट सावित्री व्रत को अलग-अलग नाम से जाना जाता है। इसको वट पूर्णिमा व्रत अथवा वट अमावस्या व्रत के नाम से भी जानते हैं। इसके अलावा बरगद अमावस्या भी वट सावित्री व्रत का ही दूसरा नाम है।
वट सावित्री व्रत निर्जला होता है क्या?
जी हां, आमतौर पर वट सावित्री का व्रत बिना जल के अर्थात निर्जला ही रखना चाहिए। तभी इसका सही फल मिलता है।
वट सावित्री व्रत में पानी कब पीना चाहिए
वट सावित्री व्रत के दिन जब आपका व्रत पूरा हो जाए, तो व्रत खोलने के बाद आप पानी पी सकते हैं।

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