गर्मी पर कविता - Garmi Par Kavita | Poem On Sun & Summer In Hindi | ग्रीष्म ऋतु व सूरज पर कविता

गर्मी पर कविता - Garmi Par Kavita | Poem On Sun & Summer In Hindi | ग्रीष्म ऋतु व सूरज पर कविता

प्रिय पाठकों, गर्मी एक ऐंसा सीज़न है, जो हर किसी को परेशान कर देता है। गर्मी में सूरज अर्थात् भगवान सूर्य अपनी तिकोनी तिरछी किरणों को मानों धरती पर सीधी तेज गति से फेंकते हों। 

जी हाँ, आप सभी का भारत की नम्बर 1 एजुकेशनल वेबसाइट SanskritExam.Com में स्वागत है। आज के इस आर्टिकल में हम गर्मी पर कविता अर्थात् ग्रीष्म ऋतु एवं सूरज पर कविता प्रस्तुत कर रहे हैं। 

यह कविता प्रसिद्ध हिंदी संस्कृत कवि सन्दीप कोठारी द्वारा विरचित है। कविता में गर्मी के सीजन का एवं सूरज का आलंकारिक वर्णन किया गया है। Poem On Sun & Summer In Hindi , Garmi Par Kavita नीचे दी गयी है। 


गर्मी पर कविता / ग्रीष्म ऋतु व सूरज पर कविता / Garmi (Grishma Ritu) Par Kavita


🔥🌞 गर्मी व सूरज पर कविता 🌞🔥
 कविता- तपता तन 

गर्मी से ये तपता तन
बोला सूरज से ये मन।
आता हर दिन जाता हर दिन
सांझ सवेरे अरुण वदन।।

प्यारा तुझको जेठ महीना
रहता है पूरा दिन भर।
प्रकृति-शिशु ये तपन सहेगा
दया रहम अब कुछ तो कर।

देखूं तुझको शाम सवेरे
तू तो रहता इतनी दूर
लगता कैंसे फिर ये जैंसे
इतनी पास है मेरी ओर।।

प्रकृति का अनुपम उपहार
करती ये तुझसे शृंगार
डूबा जब तू हुआ अंधेरा
खिलमिल उजियारा है तेरा।।

सूरज भी बोले तब सुनकर
सुनो प्रकृति के तुम हे शिशुवर
प्रकृति-सिन्धु तव स्वामिनी स्वामी
मैं तो हूँ उनका अनुगामी।।

सृष्टिप्रलय के रूपक मानो
प्रकृतिपुरुष या तुम पहचानो।।
आज्ञापालक उनका रहता
मैं भी तपती गर्मी सहता।

मुझको भी रहती ये प्रतीक्षा
सावन भादों आने की इच्छा‌।
शरद शिशिर की रहती आस
शीत चन्द्र की शीतल प्यास

रवि की माया समझ न पाया।
प्रीत है छाया दीप्त सी काया।।
भोर उषा और संध्या तेरी
प्रियतम मानों प्रकृति में मेरी।।

फिर बोला सन्दीपक शिशु ये
भानु दिवाकर अरुण धन्य हे।
कोमल हस्त अब युगलाकार
करो प्रणाम मेरा स्वीकार।।


🖊️संस्कृत हिन्दी कवि- सन्दीप कोठारी , जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) अलुमनस 🌺🌳🌏🌹🌺

नोट- कविता में प्रकृति का मानवीकरण किया गया एवं कविता निसर्ग से ही विविध अलंकारों के साथ प्रस्फुटित हुई है।

🖊️Eminent Poet- Sandeep Kothari
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गर्मी (ग्रीष्म ऋतु) एवं सूरज पर कविता का भावार्थ

उपरोक्त कविता में कवि Mr Sandeep Kothari जी ने बहुत ही सरस शैली में प्रकृति का मानवीकरण करते हुए ग्रीष्म ऋतु तथा सूरज का वर्णन किया है। ग्रीष्म ऋतु में किस प्रकार सूरज के ताप से संसार तपने लगता है- इसका मार्मिक चित्रण इस कविता के माध्यम से किया गया है। प्रस्तुत कविता हिन्दी साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत रचना है।

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गर्मी पर कविता - Garmi Par Kavita | Poem On Sun & Summer In Hindi | ग्रीष्म ऋतु व सूरज पर कविता


मेरी कविता की इस शृंखला में आज के इस आर्टिकल में गर्मी पर कविता - Garmi Par Kavita , Poem On Sun & Summer In Hindi , Grishm Ritu & Suraj Par Kavita अर्थात् सूरज पर कविता प्रस्तुत की गयी। 

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