गणेश चतुर्थी का व्रत कैसे करें- जानिए नियम | Ganesh Chaturthi Vrat Vidhi

क्या आप जानते हैं गणेश चतुर्थी का व्रत कैसे करते हैं, गणेश चतुर्थी का व्रत कैसे मनाया जाता है, गणेश चतुर्थी का व्रत करने से क्या होता है, गणेश चतुर्थी में हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। यहां हम आपको इन सभी सवालों का सटीक जवाब दे रहे हैं। गणेश चतुर्थी पूरे भारत में धूमधाम से मनाई जाती है। यह भगवान गणेश का उत्सव है। 

यदि आप भगवान गणेश के भक्त हैं तो आपको गणेश चतुर्थी का व्रत जरूर रखना चाहिए, लेकिन इस व्रत को रखने से पहले आपको पता होना चाहिए कि गणेश चतुर्थी का व्रत कैसे रखें, गणेश चतुर्थी व्रत की विधि क्या होती है। इसके क्या-क्या नियम है। तो आइये, गणेश चतुर्थी के व्रत से जुड़ी इन महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं।

गणेश चतुर्थी का व्रत कैसे करें- Ganesh Chaturthi Vrat Vidhi

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के भक्तों के लिए एक विशेष दिन है। अतः उनको यह व्रत नियम पूर्वक रखना चाहिए। भगवान गणेश समस्त प्रकार की इच्छाओं को पूर्ण करने वाले, रिद्धि सिद्धि देने वाले एवं संकटों को हरने वाले माने जाते हैं। 

गणेश भगवान को प्रसन्न करने के लिए हमें गणेश चतुर्थी का व्रत सही ढंग से करना चाहिए। गणेश चतुर्थी का व्रत कैसे करें- यह जानने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें.

  • प्रातः काल स्नान करें।
  • स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • इसके बाद पूजा स्थान को स्वच्छ करें।
  • पूजा स्थान में एक चौकी पर भगवान गणेश की मूर्ति रखें।
  • एक अन्य चौकी पर कलश की स्थापना करें।
  • भगवान गणेश के साथ गौरी माता की प्रतिमा भी रखें।
  • तत्पश्चात गौरी गणेश एवं कलश का पूजन करें।
  • धूप, दीप, चंदन, अक्षत, शृंगार आदि द्रव्यों से यथाशक्ति पूजन करें।
  • गणेश जी को दूर्वा अवश्य चढ़ाएं।
  • तत्पश्चात गणेश चालीसा, गणपति अथर्वशीर्ष एवं भगवान गणेश के मंत्रों का जप करें।
  • ॐ गं गणपतये नमः इस मंत्र का अच्छे से जाप करें।
  • पूजन के बाद भगवान गणेश को लड्डू का भोग लगाएं।
  • इस प्रकार पूरे दिन गणेश जी की भक्ति करनी चाहिए।
  • संध्या काल को चंद्रमा की पूजा करने के पश्चात गणेश चतुर्थी का व्रत पूर्ण करें।


गणेश चतुर्थी का व्रत कब रखें? मुहूर्त व समय

गणेश चतुर्थी के दिन प्रातः काल स्नान आदि से निवृत होकर पूरे दिन भर भगवान गणेश जी के लिए गणेश चतुर्थी का व्रत रखना चाहिए एवं सायं काल गणेश चतुर्थी व्रत का उद्यापन कर देना चाहिए। 

वैसे तो प्रत्येक महीने में गणेश चतुर्थी आती है और चतुर्थी तिथि भी भगवान गणेश को ही समर्पित है। अतः आप हर महीने चतुर्थी को व्रत रख सकते हैं और इसका उद्यापन भी कर सकते हैं.


गणेश चतुर्थी का व्रत क्यों किया जाता है

विभिन्न शास्त्रों तथा पुराणों में गणेश चतुर्थी के व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर 10 दिनों तक भगवान गणेश पृथ्वी पर निवास करने के लिए आते हैं। अतः ऐसे में भगवान गणेश के भक्तों को गणेश चतुर्थी का व्रत अवश्य रखना चाहिए। भारत के विभिन्न राज्यों में गणेश चतुर्थी का व्रत बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है।

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गणेश चतुर्थी का व्रत करने से क्या होता है?

बहुत से लोगों का यह सवाल भी होता है कि गणेश चतुर्थी व्रत करने से क्या लाभ होता है? हम आपको बता दें कि भगवान गणेश सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं। 

वह समस्त ऐश्वर्य को प्रदान करते हैं तथा रिद्धि और सिद्धि के स्वामी है। जो भी भक्त गणेश चतुर्थी का व्रत रखते हैं। गणेश चतुर्थी के इस पुण्य व्रत को करने से उनको निम्न फायदे अर्थात लाभ होते हैं।

  • घर में सुख-समृद्धि आती है।
  • आर्थिक संपन्नता 
  • संकट दूर होते हैं।
  • मन प्रसन्न होता है।
  • मनोकामना पूर्ण होती है।
  • ज्ञान एवं बुद्धि प्राप्ति आदि।


गणेश चतुर्थी व्रत में क्या खाएं

जब भी हम कोई व्रत रखते हैं तो उसमें खानपान का विशेष महत्व होता है। व्रत में हमको अपनी मनमर्जी से कुछ भी नहीं खाना चाहिए। गणेश चतुर्थी के व्रत में हम क्या खा सकते हैं- इसकी पूरी लिस्ट नीचे दी गई है।

  • फलों का सेवन
  • उबले आलू 
  • दूध व दही
  • साबूदाना खिचड़ी
  • साबूदाना खीर आदि।


गणेश चतुर्थी के व्रत में आप उपरोक्त चीजें खा सकते हैं। विशेष रूप से आपको इस व्रत में फलाहार ही करना चाहिए।


गणेश चतुर्थी का व्रत कब खोला जाता है

जब भी हम कोई व्रत रखते हैं तो उसमें उस व्रत को रखने का समय और उस व्रत को खोलने अर्थात तोड़ने का समय शास्त्र के अनुसार ही होना चाहिए। 

गणेश चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही खोलना चाहिए। जब सायं काल को चंद्रमा निकल जाएं तो चंद्र को अर्घ्य देना चाहिए एवं चंद्रमा की भी पूजा करनी चाहिए। तत्पश्चात आप गणेश चतुर्थी का व्रत खोल सकते हैं।

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गणेश चतुर्थी व्रत उद्यापन विधि- Ganesh Chaturthi Vrat Udyapan

गणेश चतुर्थी के व्रत का पूर्ण फल तभी प्राप्त होता है, जब आप इस व्रत को सही विधि से पूर्ण करते हैं। यदि किसी कारणवश आपको गणेश चतुर्थी का व्रत बीच में ही खोलना पड़े तो इसके लिए आपको गणेश चतुर्थी व्रत की उद्यापन विधि सही से आनी चाहिए। 

प्रातः काल स्नान करने के पश्चात भगवान गणेश की पूजा करें और पूरे दिन भर व्रत रखें। गणेश चतुर्थी के पूरे दिन आप भगवान गणेश की पूजा, गणेश चालीसा का पाठ, भगवान गणेश की आरती, गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ, गणेश जी के भजन इत्यादि अवश्य करें। 

तत्पश्चात संध्या के समय चंद्रमा की पूजा करने के बाद भगवान गणेश के व्रत का उद्यापन यानी पारण करें। इस प्रकार आपको गणेश चतुर्थी व्रत करने से पूर्ण फल की प्राप्ति होगी।

प्रिय पाठकों, आज के इस आर्टिकल में भारत की नंबर वन धार्मिक हिंदी वेबसाइट sanskritexam.com पर गणेश चतुर्थी का व्रत कैसे करें, गणेश चतुर्थी व्रत उद्यापन विधि, गणेश चतुर्थी व्रत का शुभ मुहूर्त 2023 इत्यादि गणेश चतुर्थी व्रत से जुड़ी विभिन्न प्रकार की जानकारी दी गयी। 

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