घर में पितरों का स्थान कहां होना चाहिए- सही जानकारी

क्या आपको पता है कि घर में पितरों का स्थान कहां होना चाहिए, पितरों की पूजा किस दिशा में करनी चाहिए तो आइये, आपके इस सवाल का सटीक जवाब यहां दिया जा रहा है। 

जी हां, श्राद्ध पक्ष हो अथवा कोई भी समय, पितरों की पूजा अवश्य करनी चाहिए। पितृ पूजा करने से पितृ दोष की शांति हो जाती है एवं हमारे पितरों को मुक्ति मिल जाती है लेकिन आजकल लोगों को सटीक जानकारी नहीं होती है। जिसकी वजह से वे अपने घर में पितरों को कहीं भी रख लेते हैं। 

कोई बेडरूम में रख लेता है तो कोई अलमारी में। यह शास्त्र के अनुसार पूर्ण रूप से गलत है। अतः आपको यह पता होना चाहिए कि घर में पितरों का स्थान कहां होना चाहिए। यहां हम आपको यही जानकारी दे रहे हैं। 

इसके अलावा पितरों का स्थान कैसे बनाएं, पितरों को कौन सी दिशा में पानी देना चाहिए इत्यादि पितरों के स्थान एवं पितृ पूजा से जुड़ी अन्य विशेष प्रकार की जानकारी भी दी जा रही है.


घर में पितरों का स्थान कहां होना चाहिए

हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि जब भी आप अपने घर में पितरों को स्थान देते हैं तो शास्त्र के अनुसार सही दिशा में ही रखें। पितरों के लिए सही स्थान उत्तर दिशा में होता है। घर में पितरों को उत्तर दिशा की तरफ ही रखना चाहिए। 

इस बात का भी हमेशा ध्यान रखें कि उत्तर दिशा में पितरों को जब भी रखें तो उनका मुख दक्षिण की ओर होना चाहिए। शास्त्र के अनुसार पितरों का यही सही स्थान माना जाता है. पितरों के स्थान से जुड़ी कुछ अन्य विशेष जानकारी निम्नलिखित है.

  • बेडरूम में पितरों का स्थान नहीं होना चाहिए.
  • बैठक रूम में पितरों को न रखें।
  • किचन या स्टोर रूम में भी पितरों को नहीं रखना चाहिए।
  • पितरों को एक विशेष कक्ष में स्थान दें।
  • घर में अधिक पितरों की फोटो नहीं लगानी चाहिए।


घर में पितरों का स्थान कैसे बनाएं?

अभी तक आपने जान लिया कि घर में पितरों का स्थान कहां होना चाहिए। अब आपको इस बात की भी सही जानकारी होनी चाहिए कि घर में पितरों का स्थान कैसे बनाते हैं। आइये, शास्त्र के अनुसार इसको भी जानते हैं। 

  • घर में पितरों का स्थान बनाने से पहले आपको पितरों की पूजा करवानी होती है। 
  • पितरों का स्थान श्राद्ध पक्ष यानी पितृ पक्ष में भी बना सकते हैं।
  • सबसे पहले पितरों का आवाहन किया जाता है।
  • तत्पश्चात उत्तर दिशा में पितरों की फोटो रखी जाती है।
  • इसके बाद पितरों की पूजा करनी चाहिए।
  • हो सके तो पितरों को तर्पण एवं पिंडदान दें।
  • पितरों की पूजा को विधि विधान से करने के लिए किसी पंडित की सहायता अवश्य लें।

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पितरों को कौन सी दिशा में पानी देना चाहिए?

शास्त्र के अनुसार देव तर्पण, ऋषि तर्पण, पितृ तर्पण आदि सभी को तर्पण देते समय अलग-अलग दिशाओं का नियम है। पितरों को दक्षिण दिशा की ओर मुख करके ही पानी देना चाहिए। 

अर्थात जब भी आप पितरों का तर्पण करते हैं तो आपका मुख दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए। इसके बाद आप काले तिल लेकर पितरों को जल के साथ तर्पण दे सकते हैं।


घर में पितरों की तस्वीर कौन सी दिशा में लगानी चाहिए?

अपने घर में पितरों की फोटो यानी तस्वीर को हमेशा उत्तर दिशा की तरफ ही लगानी चाहिए। उत्तर दिशा में पितरों की फोटो हो और उसका मुख दक्षिण की ओर होना चाहिए। यह शास्त्र का नियम है।


पितृ दोष खत्म करने के लिए क्या करना चाहिए?

पितृ दोष खत्म करने के लिए पितरों की पूजा करवानी चाहिए। विशेष रूप से श्राद्ध पक्ष में पितरों को तर्पण देना चाहिए एवं पितरों का पिंडदान भी करना चाहिए। 

यदि पितृ दोष की पूर्ण रूप से हमेशा के लिए शांति करना चाहते हैं और पितरों की मुक्ति करना चाहते हैं तो पितरों की विशेष पूजा भी करवा सकते हैं। पितृ दोष निवारण पूजा कहां होती है एवं कैसे होती है- यह जानने के लिए यहां क्लिक करें- पितृदोष निवारण पूजा कहां करें व कैंसे करें?


पितरों की पूजा किस दिशा में करनी चाहिए

पितरों की पूजा हमेशा दक्षिण दिशा में ही करनी चाहिए। अर्थात यदि आप पितरों को तर्पण दे रहे हो तो दक्षिण दिशा की ओर मुख करके ही दें। जब घर पर पितरों का पूजन करते हैं तो उत्तर दिशा में उनकी फोटो रख सकते हैं और वहां पर उनकी पूजा कर सकते हैं।


पितरों को पानी कौन दे सकता है?

पितरों को तर्पण देने का भी विशेष नियम है. घर का कोई भी व्यक्ति पितरों को पानी नहीं दे सकता है। शास्त्र में इस बात का उल्लेख किया गया है कि घर का मुख्य सदस्य ही पितरों को तर्पण दें। 

यदि घर में मुख्य सदस्य ना हो तो दूसरा विशेष मुख्य व्यक्ति ही पितरों का तर्पण करें। पितरों का तर्पण हमेशा पुरुष को ही करना चाहिए।


पितरों की स्थापना कैसे करें?

पितरों की स्थापना करना आसान कार्य नहीं है। हमारी मानें तो पितरों की स्थापना करने के लिए किसी पंडित जी को अवश्य बुलाएं। क्योंकि यह आपका खुद का कार्य नहीं है। 

यदि आप घर में किसी ब्राह्मण के द्वारा पितरों का पूजन एवं उनकी स्थापना करवाते हैं तो इससे पितृ देवता भी प्रसन्न होते हैं। यदि आप स्वयं ही पितरों की स्थापना करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको पूरी विधि और शास्त्र के नियम तथा मंत्रों का ज्ञान होना जरूरी है।

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प्रिय पाठकों, आज के इस आर्टिकल में पितरों का स्थान कहां होना चाहिए। अर्थात पितरों का स्थान कौन सी दिशा में होता है?, पूर्वजों की तस्वीर का मुंह किधर होना चाहिए? Pitro Ka Sthan Kahan Hona Chahiye इत्यादि पितरों के स्थान से जुड़ी विभिन्न प्रकार की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गयी। यदि अभी भी आपके मन में किसी भी प्रकार का कोई संदेह या प्रश्न हो तो आप नीचे कमेंट में पूछ सकते हैं।

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