UGC NET Sanskrit Notes | UGC NET Sanskrit Study Materia l संस्कृत नोट्स

प्यारे मित्रों 😍 क्या आप भी एक संस्कृत प्रोफेसर बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं। क्या आप भी UGC NET Sanskrit राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा को आसानी से क्रैक करना चाहते हैं। तो आइये। आज हम आपके लिए लेकर के आए हैं- UGC NET Sanskrit Notes- Sanskrit Study Material 


प्यारे मित्रों 😍 आप सभी का स्वागत है आपकी अपनी इस SanskritExam.Com वेबसाइट में। संस्कृत भाषा को एक नयी दिशा देने के उद्देश्य से बनायी गयी यह वेबसाइट आप सभी संस्कृत प्रेमीजनों एवं संस्कृत प्रतिभागियों के लिए निरन्तर दिन प्रतिदिन UGC NET Sanskrit Notes, UGC NET Sanskrit Study Material For Code 25 & ,73 , UGC NET Sanskrit PDF Notes एवं विभिन्न प्रकार के UGC NET Sanskrit Mock Test, UGC NET Sanskrit Question Paper आदि सामग्री उपलब्ध करवाती रहती है।


आज का विषय 👇

  • UGC NET Sanskrit Notes
  • UGC NET Sanskrit Study Material
  • UGC NET Sanskrit Code 25 & 73 Notes
  • UGC NET Sansrit Unit- 1 Notes
  • UGC NET Sanskrit Vaidik Sahitya

प्यारे पाठकों 😍 UGC NET Sanskrit Syllabus 2020-21 के अनुसार प्रथम यूनिट में वैदिक साहित्य का विषय लगा हुआ है। यह UGC NET Sanskrit 25 Code & 73 Code दोनों में ही लगा हुआ है।  

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मित्रों,😍 आज हम जिस विषय़ की चर्चा करने वाले हैं, उस विषय से UGC NET SANSKRIT में हर साल प्रश्न पूछे गये हैं। आज हम वैदिक साहित्य के अन्तर्गत वैदिक छन्दों का विशद अध्ययन करने जा रहे हैं। वैदिक छन्दों से हर साल संस्कृत 25 कोड व 73 कोड, दोनो मे ंप्रश्न पूछे जाते हैं। जैंसे कि-

यू जी सी नेट में पूछे गये प्रश्न ➡ 

  • आर्षी गायत्री में कितने वर्ण होते हैं?
  • निचृद्गायत्री छन्द में कितने अक्षर होते हैं?
  • अतिशक्वरी में कितने वर्ण होते हैं?
  • पंक्ति छन्द के एक पाद में कितने वर्ण होते हैं आदि।


               आज का विषय ➡ वैदिक छन्द 

प्रस्तावना

 वैदिक छन्द इस विषय से हर साल परीक्षा में एक न एक प्रश्न तो आता ही है। अतः आपसे निवेदन है कि इस विषय को अच्छे ढंग से पढिए। यह UGC NET Sanskrit Study Material दोनों ही संस्कृत कोड के लिए अत्यन्त उपयोगी है। 


वैदिक छन्दों का महत्व सम्पूर्ण वैदिक साहित्य में अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका रखता है। सबसे पहले यदि हम बात करें छन्द की तो - "छन्दांसि छादनात्" इस व्युत्पत्ति के अनुसार - हम यह अर्थ ले सकते हैं कि साहित्य में जो किसी भी साहित्यिक कृत्ति को एक विशेष लय एवं नियमबद्ध तरीके से आवृत्त करता है उसे छन्द कहते हैं।

छन्दः पादौ तु वेदस्य

छन्द वेद का पैर है।

वैदिक साहित्य में छन्द का कितना महत्वपूर्ण स्थान है यह उपरोक्त पंक्ति से सुस्पष्ट है। वेद एक पुरुष है। जिसके छः ६ अंग हैंं। वेद पुरुष के उन छः अंगों में एक अन्यतम महत्वपूर्ण अंग छन्द है , जो कि वेद का पैर है।

वेदों में प्रयुक्त मुख्य छन्द -

सात

वेदों में प्रयुक्त अन्य छन्द-

चौदह

सबसे बडा छन्द-     

विराट छन्द

विराट छन्द में अक्षरसंख्या-

108 अक्षर


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छन्दों की शुरुआत (UGC NET Sanskrit Study Material)

अयि प्रिय मित्रों,😍 छन्द क्या है यह तो आपने ऊपर समझ ही लिया कि आवृत्त एवं नियबद्ध लयबद्ध करने वाला ही छन्द कहलाता है। अब यंहा यह चर्चा करना अभीष्ट है कि छन्द की शुरुआत कब हुई? कंहा से हुई? छन्द के प्रकार आदि-आदि।

                    महत्वपूर्ण तथ्य

छन्द प्रवर्तक      

पिंगलाचार्य

छन्द का आदि ग्रंथ

छन्दसूत्रम्

कुल अध्याय संख्या     

आठ

विभाजन क्रम

दो भागों में

1 से 4 अध्याय तक

वैदिक छन्द

4 से 8 अध्याय तक

लौकिक छन्द


इस प्रकार छन्द के मुख्य प्रतिनिधि ग्रन्थ के रूप में सर्वदा पिंगल द्वारा विरचित पिंगलसूत्रम् को ही स्वीकार किया जाता है। इसी प्रकार सामवेद का निदान सूत्र, ऋग्वेद प्रातिशाख्य आदि ग्रन्थों में भी छन्दों का विवेचन किया गया है।



छन्दों के प्रकार

मित्रों,😍 सर्वप्रथम छन्दों को दो भागों में विभाजित किया जाता है। तत्पश्चात उनके भी अनेक भेद हो जाते हैं लेकिन सबसे पहले छन्दों के दो विभाग - 

  1. वैदिक छन्द
  2. लौकिक छन्द


इस प्रकार पुनः इनके भी विभिन्न भेद पाए जाते हैं। एक ओर जंहा वैदिक छन्दों को स्वराट् आदि भेदों से विस्तृत किया जाता है। वंही दूसरी ओर लौकिक छन्द भी वार्णिक , मात्रिक आदि रूप में व्यवहृत होते हैं।



वैदिक छन्द

दोस्तों, हम यंहा आज वैदिक छन्दों की ही चर्चा करेंगे । सर्वप्रथम वैदिक छन्दों की बात करें तो - वेदों में मुख्यतः ७ छन्दों का अधिक प्रयोग हुआ है। यद्यपि इसके अतिरिक्त भी छन्द वेदों में पाए जाते हैं। लेकिन मुख्य छन्दों की बात की जाए तो - ७ सात हैं । अन्य छन्द १४ चतुर्दश हैं

 

चतुर्दशछन्दांसि वेदे प्रयुक्तानि किञ्च सप्त एव प्रमुखानि


वैदिक छन्दों में जो मुख्य सात छन्द है। पहले हम उनकी चर्चा कर लेते हैं। वेदों के सात मुख्य छन्द कुछ इस प्रकार हैं ।

1. गायत्री

5. पंक्ति

2. उष्णिक्

6. त्रिष्टुप्

3. अनुष्टुप्

7. जगती

4. बृहती

 

ये उपरोक्त वेदों में प्रयुक्त मुख्य छन्द हैं । UGC NET SANSKRIT की परीक्षा में यहाँ से हर साल प्रश्न पूछे जाते हैं। ध्यातव्य यह है कि इन छन्दों को चार - चार भागों में विभाजित किया जाता है। अर्थात् प्रत्येक छन्द के चार भाग हैं जो कि हम आगे चर्चा करने वाले हैं।

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न्दों का वर्णक्रम

इन सभी छन्दों के पाद होते हैं। किसी में चार पाद तो, किसी में तीन पाद। किसी में पांच पाद तो किसी में छः पाद आदि। इन छन्दों में वर्णों की एक निश्चित व्यवस्था होती है जिससे हम इनकी पहचान कर पाते हैं।

  छन्द

  अक्षऱ

1. गायत्री छन्द

24 अक्षर

2. उष्णिक् छन्द

28 अक्षर

3. अनुष्टुप् छन्द

32 अक्षर

4. बृहती छन्द

36 अक्षऱ

5. पंक्ति छन्द

40 अक्षऱ

6. त्रिष्टुप् छन्द

44 अक्षऱ

7. जगती छन्द

48 अक्षऱ


इस प्रकार इन छन्दों में वर्णों की एक नियत व्यवस्था होती है। जो कि आप ऊपर देख सकते हैं । अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन छन्दों के चार चार भाग होते हैं।

1. निचृद्- 1 अक्षऱ कम

5. विराट्- दो अक्षर कम

2. भुरिक- 1 अक्षर ज्यादा

6. स्वराट्- दो अक्षर ज्यादा


उपरोक्त वैदिक छन्दों के चार- चार विभाग किए जाते हैं और मैं आपको बता दूँ कि यँहा से बहुत बार प्रश्न पूछे गये हैं। जी हाँ। उदाहरण के लिए- जैंसे गायत्री छन्द है तो उसके चार भाग - निचृद्गायत्री , भुरिक् गायत्री, विराट् गायत्री, स्वराट् गायत्री। 

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि इन भागों में वर्णों की संख्या का परिवर्तन हो जाता है। अर्थात् जैंसे गायत्री छन्द में २४ अक्षर होते हैं, तो निचृद्गायत्री में परिवर्तन हो जाएगा ! निचृद्गायत्री में एक अक्षर कम- २३ अक्षर होते हैं। ऐंसे ही भुरिक् गायत्री में एक अक्षर ज्यादा- २५ अक्षर होते हैं। 

विराट् गायत्री में गायत्री में दो अक्षर कम अर्थात् २२ अक्षर होते हैं तो वंही स्वराट् गायत्री में दो अक्षऱ ज्यादा- २६ अक्षर होते हैं। यह नियम अन्य सभी छन्दो के साथ भी लागू होता है।


इसको याद रखने के लिए हम आपके लिए एक अद्भुत् तरीका प्रस्तुत कर रहे हैं। तो आइये जानते हैं । सबसे पहले तो आप मुख्य सात छन्दों में कितने - कितने अक्षर होते हैं। इसे ध्यान से पढ लो। जब हम इस बात को अच्छी तरह समझ जाएं कि गायत्री छन्द में २४ अक्षर होते हैं। उष्णिक् छन्द में २८ , अनुष्टुप छन्द में ३२ , बृहती छन्द में ३६ , पंक्ति छन्द में ४० , त्रिष्टुप् छन्द में ४४ तथा जगती छन्द में ४८ अक्षर होते हैं। इसी के साथ हमें इन छन्दों के पादों पर भी ध्यान देना है। जिसको आप इस तरीके से सरलतापूर्वक याद रख सकते हैं।

छन्द

अक्षऱ

   पाद

गायत्री

24

3 पाद, प्रतिपाद 8 अक्षर

उष्णिक्

28

3 पाद, प्रतिपाद 8 अक्षर, तृतीय पाद- 12 अक्षऱ

अनुष्टुप्

32

4 पाद, प्रतिपाद 8 अक्षर

बृहती

36

4 पाद, प्रतिपाद 8 अक्षर, तृतीय पाद 12 अक्षर

पंक्ति

40

5 पाद, प्रतिपाद 8 अक्षर

त्रिष्टुप्

44

4 पाद, प्रतिपाद 11 अक्षर

जगती

48

4 पाद, प्रतिपाद 12 अक्षर

इसके अतिरिक्त एक बात अत्यंत महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक पाद में कितने अक्षर होते हैं। तो देखिए!- 


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गायत्री ➡ गायत्री छन्द में तीन पाद होते हैं। प्रत्येक में आठ-आठ अक्षर मिलाकर २४ अक्षर हो जाते हैं।
उदाहरण - तत्पुरुषाय विद्महे। महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्।


उष्णिक् ➡ उष्णिक छन्द में भी तीन पाद होते हैं। प्रथम तथा द्वितीय पाद में ८+८ अक्षर एवं तृतीय पाद में १२ अक्षर होते हैं। कुल मिलाकर ३६ अक्षर हुए।


अनुष्टुप ➡ अनुष्टुप छन्द में चार पाद होते हैं। प्रत्येक पाद में आठ ८ + ८ अक्षर होते हैं। कुल मिलाकर ३२ अक्षर हुए।
उदाहरण - सहस्रशीर्षाः सहस्राक्षः सहस्रपात० आदि मन्त्र


बृहती ➡ बृहती छन्द में भी चार पाद होते हैं प्रथम, द्वितीय तथा चतुर्थ पाद में ८-८ अक्षर होते हैं तथा तृतीय पाद में १२ अक्षर। कुल मिलाकर ३६ अक्षर होते हैं।


पंक्ति ➡ पंक्ति छन्द एक विशेष छन्द है। इसमें पांच ५ पाद होते हैं। प्रत्येक पाद में ८-८ अक्षर होते हैं। कुल मिलाकर ८×५ = ४० अक्षर होते हैं।


त्रिष्टुप् ➡ त्रिष्टुप् छन्द में चार पाद होते हैं। प्रत्येक पाद में ११-११ अक्षर होते हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर ११×४= ४४ अक्षर होते हैं।


जगती ➡ जगती छन्द में भी चार पाद होते हैं। प्रत्येक पाद में १२-१२ अक्षर होते हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर १२×४=४८ अक्षर हुए।

इस प्रकार ये हमने सात प्रमुख छन्दों का विवेचन किया। इसी क्रम में इनके भेदों निचृद्गायत्री, भुरिक् गायत्री, आदि को भी समझना चाहिए ।


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छन्दो के अन्य प्रकार (UGC NET Sanskrit Notes)

प्यारे पाठकों,😍 यंहा अभी तक आपने वैदिक छन्दों को समझा एवं उनके चार भेद- निचृद्, भुरिक्, विराट् , स्वराट् रूप में देखा। अब हम आगे वैदिक छन्दो के कुछ अन्य प्रकारों को समझने का प्रयास करते हैं। 

मित्रों, यदि आप UGC NET Sanskrit Previous Year Question Paper देखेंगे तो, आपको यंहा से जरूर प्रश्न मिलेंगे। यदि आपके पास UGC NET SANSKRIT PREVIOUS QUESTION PAPERहीं हैं तो आप अभी हमारी इसी वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं। डाउनलोड करने के लिए क्लिक यंहा क्लिक करें। CLICK HERE 

आर्षी गायत्री में कितने अक्षऱ होते हैं इस प्रकार के बहुत सारे प्रश्न UGC NET SANSKRIT में अक्सर पूछे जाते हैं। अब हम यंहा छन्दो के इन सभी प्रकारों की चर्चा करते हैं। छन्दों के विभिन्न अन्य प्रकार व उनमें अक्षरसंख्या-

जैंसे हमने अभी तक प्रत्येक छन्द के चार भेद निचृद् आदि प्रकार से समझे। ठीक उसी प्रकार से प्रत्येक छन्द के आठ- आठ और अन्य प्रकार होते हैं। जैंसे कि-

  छन्द

  अक्षऱ

1. आर्षी गायत्री

24 अक्षर

2. दैवी गायत्री

1 अक्षर

3. आसुरी गायत्री

15 अक्षर

4. प्राजापत्या गायत्री

8 अक्षऱ

5. याजुषी गायत्री

6 अक्षऱ

6. साम्नी गायत्री

12 अक्षऱ

7. आर्ची गायत्री

18 अक्षऱ

8- ब्राह्मी गायत्री

36 अक्षऱ

प्यारे मित्रों, 😍 यही नियम आपको प्रत्येक छन्द के साथ समझना चाहिए। प्रत्येक छन्द के इसी प्रकार से आठ-आठ भेद होते हैं, जिनमें लोक में प्राय आर्षी भेद ही ज्यादा देखने को मिलता है। 


यंहा नीचे तालिका के माध्यम से सभी छन्दो के प्रकार व उनमें अक्षऱ संख्या के बारे में बताया गया है। आर्षी दैवी आदि छन्दो के आठ प्रकार निम्नरूप से समझें। इनको गायत्री, उष्णिक्, अनुष्टुप आदि उत्तरोत्तर क्रम में जानें।

आर्षी

24

28

32

36

40

44

48

दैवी

1

2

3

4

5

6

7

आसुरी

15

14

13

12

11

10

9

प्राजापत्या

8

12

16

20

24

28

32

याजुषी

6

7

8

9

10

11

12

साम्नी

12

14

16

18

20

22

24

आर्षी

18

21

24

27

30

33

36

ब्राह्मी

36

42

48

54

60

66

72


वैदिक छन्दों के उपरोक्त आठ प्रकार UGC NET  SANSKRIT में अक्सर पूछे जाते हैं। अतः ध्यान से एक बार, दो बार, बार-बार पढें, जब तक कि ये सभी छन्दों के प्रकार आपको याद न हो जाएं। वैंसे तो वैदिक छन्दो के अन्य प्रकार भी मिलते हैं- जैंसे कि वर्धमान गायत्री, प्रतिष्ठा गायत्री आदि लेकिन वे सभी प्रकार प्रायः परीक्षा में नहीं पूछे जाते हैं। UGC NET SANSKRIT STUDY MATERIAL अथवा UGC NET SANSKRIT NOTES PDF आप हमारी इसी वेबसाइट के मेनूबार में जाएँ। 


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उपसंहार (UGC NET Sanskrit)

मित्राणि! वैदिक साहित्य के अन्तर्गत वैदिक छन्दों का अध्ययन अत्यन्त आवश्यक है। परीक्षा की दृष्टि से अत्यन्त महत्वपूर्ण है। विशेष रूप से UGC NET Sanskrit Code 25 & Ugc Net Sanskrit Code 73 एवं अन्य सभी परीक्षाओं के लिए बहुत उपयोगी है। प्यारे मित्रों, वैदिक छन्दों पर यह UGC NET SANSKRIT STUDY MATERIAL आप सभी के लिए अत्यन्त उपयोगी होगा। 


FAQ (प्रश्नोत्तरी)

  • UGC NET SANSKRIT NOTES PDF DOWNLOAD कैंसे करें?

यदि आप भी UGC NET Sanskrit की तैयारी कर रहे हैं तो UGC NET SANSKRIT NOTES PDF DOWNLOAD करने के लिए आप हमारी वेबसाइट SANSKRITEXAM.COM पर जाएँ।


  • UGC NET SANSKRIT STUDY MATERIAL FREE  कँहा मिलेगा?

UGC NET SANSKRIT STUDY MATERAL, ARTICLE NOTES आदि विभिन्न यूजीसीनेट संस्कृत सम्बन्धित उपयोगी सामग्री के लिए आप हमारी इसी वेबसाइट के मेनूबार में जाएँ।


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यूजीसीनेट संस्कृत सिलेबस के पीडीएफ को डाउनलोड करने के लिए आप हमारी इस वेबसाइट के मेनूबार में सिलेबस सेक्शन में जाएँ।


  • BEST BOOK FOR UGC NET SANSKRIT  कंहा मिलेगी?

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