भगवत गीता 15 अध्याय संस्कृत PDF | Bhagwat Gita 15 Adhyay (Chapter 15)

भगवत गीता 15 अध्याय संस्कृत PDF | Gita 15 Adhyay PDF

भगवत गीता 15 अध्याय संस्कृत PDF | Gita 15th Adhyay PDF

SanskritExam.com वेबसाइट के इस आर्टिकल में आपका स्वागत है। पिछले आर्टिकल में भगवत गीता के अन्य अध्यायों का PDF प्रदान किया गया था तथा 12वें अध्याय से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गई थी।

इसके अतिरिक्त, भगवत गीता के विभिन्न अध्यायों के PDF भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिन्हें आप वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं।

इस आर्टिकल में आपको भगवत गीता 15 अध्याय संस्कृत PDF (Geeta 15 adhyay pdf) का लिंक दिया जा रहा है। यह PDF संस्कृत श्लोकों के साथ हिंदी अर्थ सहित उपलब्ध है। साथ ही, Geeta 15 adhyay in Sanskrit lyrics भी इसमें शामिल हैं।

डाउनलोड करने से पहले आइए 15वें अध्याय से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें जान लेते हैं।

📥 Download Geeta 15 Adhyay PDF

भगवत गीता 15 अध्याय का रहस्य

भगवत गीता का 15 अध्याय पुरुषोत्तम योग के नाम से जाना जाता है. जैसा कि इस अध्याय के नाम से ज्ञात होता है पुरुषोत्तम योग। अर्थात पुरुषोत्तम भगवान श्री कृष्ण का ही एक अन्य नाम है। इस अध्याय को भगवद् गीता का विशेष अध्याय माना जाता है।

भगवत गीता के 15वें अध्याय में भगवान श्री कृष्ण ने पीपल के वृक्ष के माध्यम से इस संसार का स्वरूप बताया है। शास्त्रों में पीपल को अश्वत्थ कहा गया है।

यह संसार उल्टे पीपल वृक्ष की तरह है। इस प्रकार भगवत गीता के 15 अध्याय में संसार का स्वरूप, जीव का स्वरूप तथा भगवान का स्वरूप अच्छे से वर्णित किया गया है।

यहां आपको Bhagwad Gita के 15वें अध्याय का पीडीएफ दिया जा रहा है जिसमें भगवत गीता का 15 अध्याय अर्थात पुरुषोत्तम योग संस्कृत श्लोक के साथ हिंदी अर्थ सहित उपलब्ध है। सुंदर चित्रों सहित भगवत गीता अध्याय 15 पीडीएफ को व्यवस्थित किया गया है।

इन्हें भी देखें 👇👇

भगवत गीता अध्याय 15 का परिचय

15 वां अध्याय गीता के सबसे छोटे अध्यायों में से एक है। दरअसल भगवत गीता का 12वां एवं 15वां ये दोनों अध्याय छोटे हैं। इनमें श्लोकों की संख्या एक समान है।

भगवत गीता के Chapter 12 में भी 20 श्लोक हैं तो 15 में अध्याय में भी 20 श्लोक हैं। यह अध्याय भगवान श्री कृष्ण के श्लोक से प्रारंभ हुआ है।

इस अध्याय के अंतिम श्लोक में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को बताते हैं कि इस Purushottam Yog को जो अच्छे से समझ लेता है। उसको कुछ भी करना शेष नहीं रह जाता है अर्थात वह सभी प्रकार के ज्ञान विज्ञान से संपन्न हो जाता है। इस अध्याय में भगवद्गीता का सार छिपा हुआ है।

गीता 15 अध्याय के प्रमुख श्लोक

ममैवांशो जीवलोके जीवभूतः सनातनः।
मनः षष्ठानीन्द्रियाणि प्रकृतिस्थानि कर्षति॥ अध्याय 15 श्लोक.7
अर्थ- यह श्लोक भगवत गीता का प्रसिद्ध श्लोक है जो कि 15 अध्याय से लिया गया है। इस श्लोक में बताया गया है कि प्राणी मात्र अर्थात प्रत्येक जीव भगवान का ही स्वरुप है। भगवान स्वयं कहते हैं कि इस संसार में यह जो जीव है वह मेरा ही अंश है जो कि सनातन है।

अर्थात अनादि काल से विद्यमान है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जीव तत्व भी सृष्टि के आदि तत्वों में से एक है। सृष्टि में कुल तीन तत्व हैं जिसमें से पहला जीव तत्व है दूसरा माया तत्व है और तीसरा ब्रह्म तत्व है।

अधश्चोर्ध्वं प्रसृतास्तस्य शाखा गुणप्रवृद्धा विषयप्रवालाः।
अधश्च मूलान्यनुसन्ततानि कर्मानुबन्धीनि मनुष्यलोके॥ अध्याय 15 श्लोक.2
अर्थ- यह भागवत गीता के 15 अध्याय का दूसरा श्लोक है जिसमें पीपल के वृक्ष के माध्यम से संसार का स्वरूप बताया गया है। संसार को पीपल का उल्टा वृक्ष बताया गया है। उस संसार रूपी पीपल वृक्ष की शाखाएं नीचे की ओर फैली हुई है। ये शाखाएं संसार के विषयों का स्वरूप है।
सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च।
वेदैश्च सर्वैरहमेव वेद्यो वेदान्तकृद्वेदविदेव चाहम्॥ अध्याय 15 श्लोक.15
अर्थ- इस श्लोक में भगवान श्री कृष्ण अर्जुन को बता रहे हैं कि हे अर्जुन मैं समस्त जीवों के हृदय में विद्यमान हूँ। मुझसे ही स्मृति ज्ञान एवं अपोहन अर्थात विस्मृति होती है। समस्त वेदों के द्वारा मैं ही जानने योग्य हूँ।
अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः।
प्राणापानसमायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम्॥ अध्याय 15 श्लोक.14
अर्थ- यह श्लोक भी भगवत गीता का एक प्रसिद्ध श्लोक है जो 15वें अध्याय में मौजूद है। इस श्लोक में बताया गया है कि भगवान स्वयं ही हमारे पेट में वैश्वानर नामक अग्नि के रूप में विद्यमान है जो कि हमारा समस्त भोजन पचाते हैं।
निर्मानमोहा जितसङ्गदोषा अध्यात्मनित्या विनिवृत्तकामाः।
द्वन्द्वैर्विमुक्ताः सुखदुःखसंज्ञैर्गच्छन्त्यमूढाः पदमव्ययं तत्॥ अध्याय 15 श्लोक.5
अर्थ- यह गीता 15 अध्याय श्लोक 5 है। इस श्लोक में भगवान ने बताया है कि किस प्रकार के लोग मेरे परमधाम को प्राप्त करते हैं। जिनको मान की इच्छा नहीं होती है, जिनका संसार की प्रति मोह नष्ट हो चुका होता है एवं जो कुसंग आदि दोषों से रहित होते हैं तथा निरंतर आत्म चिंतन से युक्त, समस्त कामनाओं से रहित मुक्त पुरुष ही उस परम पद की प्राप्ति करता है।
न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः।
यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम॥ अध्याय 15 श्लोकउनक.6
अर्थ- यह श्लोक भगवान के परमधाम की बात करता है। इसमें मोक्ष धाम की विशेष बात कही गई है जो की सूर्य से और चंद्रमा से भी परे है। भगवान कहते हैं कि जो भक्त मुझे भजता है।

वह मेरे धाम को प्राप्त होता है और मेरा धाम ऐसा है जिसे न तो सूर्य प्रकाशित कर सकता है न ही चंद्रमा, न अग्नि। क्योंकि वह शाश्वत है। वहां पहुंचकर कभी भी पुनर्जन्म नहीं होता।

इन्हें भी देखें 👇👇

गीता 15 अध्याय से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न: भगवद्गीता के 15वें अध्याय का नाम क्या है?
उत्तर: पुरुषोत्तम योग

प्रश्न: भगवत गीता के 15वें अध्याय में कुल कितने श्लोक हैं?
उत्तर: 20 श्लोक

प्रश्न: गीता 15 अध्याय का पहला श्लोक किसने कहा?
उत्तर: भगवान श्रीकृष्ण ने

प्रश्न: Gita 15 Chapter में अर्जुन ने कितने श्लोक कहे?
उत्तर: एक भी नहीं

प्रश्न: गीता 15 अध्याय पहले श्लोक में किस वृक्ष का वर्णन है?
उत्तर: पीपल (अश्वत्थ) वृक्ष का

भगवत गीता अध्याय 15 PDF

भगवत गीता अध्याय 15 पीडीएफ यदि आप भगवत गीता के 15 अध्याय का संस्कृत तथा हिंदी पीडीएफ प्राप्त करना चाहते हैं तो यहां Bhagwat Gita PDF link दिया गया है। इसमें आपको-

संस्कृत श्लोक हिंदी अर्थ सुंदर चित्र Gita 15 adhyay in Sanskrit lyrics सभी एक ही PDF में मिल जाएंगे। आप इसे आसानी से Download कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त sanskritexam.com वेबसाइट से आप विभिन्न धार्मिक स्तोत्र, धार्मिक ग्रंथ फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं।

आप चाहें तो Gita 15 Adhyay Lyrics English, भगवत गीता 15 अध्याय मराठी जमें भी डाउनलोड कर सकते हैं। उसके लिए इस वेबसाइट के PDF Section में जाएं।

📥 Download PDF Now

Post a Comment

0 Comments